असम चुनाव का असर झारखंड में : कांग्रेस-जेमएम में तकरार तेज, बयानबाजी से बढ़ी सियासी गर्मी

Anand Kumar
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Ranchi : असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के बीच गठबंधन नहीं बनने का राजनीतिक असर अब झारखंड में साफ दिखने लगा है। सत्तारूढ़ गठबंधन के दोनों प्रमुख दलों के बीच बढ़ती दूरियां अब सार्वजनिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप में बदल चुकी हैं, जिससे राज्य की राजनीति में असहजता बढ़ गई है।

‘विषैला सांप’ बयान से भड़की सियासत

जेएमएम नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस को ‘विषैला सांप’ करार देते हुए सियासी माहौल को और गरमा दिया। इस बयान के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और अपनी ही सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए।

कांग्रेस नेताओं ने हजारीबाग के विष्णुगढ़ और धनबाद के बलियापुर में हुई दुष्कर्म की घटनाओं का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया।

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कांग्रेस की नाराजगी खुलकर सामने, आंदोलन की चेतावनी

चाईबासा में कांग्रेस जिलाध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर के समापन के बाद दिल्ली लौटते समय कांग्रेस प्रभारी के राजू ने साफ संकेत दिए कि गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

उन्होंने माइनिंग लॉबी के प्रभाव में किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए बड़कागांव समेत राज्यभर में आंदोलन की चेतावनी दी। इसके साथ ही राज्य की शिक्षा व्यवस्था में गिरावट पर चिंता जताते हुए अपनी ही सरकार के कामकाज की खुलकर आलोचना की।

जेएमएम का पलटवार : “मुद्दे सरकार के अंदर उठाएं”

कांग्रेस के तल्ख रुख पर जेएमएम ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि कांग्रेस एक स्वतंत्र पार्टी है और उसे बोलने का अधिकार है, लेकिन सरकार में रहते हुए मुद्दों को सार्वजनिक मंच के बजाय अंदर ही उठाना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर कांग्रेस सार्वजनिक रूप से आरोप लगाएगी, तो जेएमएम भी जवाब देने के लिए तैयार है—“अगर आप एक उंगली मेरी तरफ उठाएंगे, तो मैं तीन उंगलियां आपकी तरफ उठाऊंगा।”

भाजपा का हमला : “सांप-नेवला की लड़ाई में राज्य प्रभावित”

सत्तारूढ़ गठबंधन में बढ़ती खटास को लेकर विपक्षी भाजपा ने दोनों दलों पर निशाना साधा। भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल वर्णवाल ने कहा कि “एक विषैला सांप है तो दूसरा नेवला,” और दोनों मिलकर राज्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों के बीच की यह खटास इस बात का संकेत है कि राज्य में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और सत्ता के भीतर केवल राजनीतिक लाभ की होड़ चल रही है।

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राजनीतिक संकेत: क्या गठबंधन पर पड़ेगा असर?

झारखंड में कांग्रेस और जेएमएम के बीच बढ़ती बयानबाजी केवल शब्दों की जंग नहीं, बल्कि गठबंधन की सेहत पर भी सवाल खड़े कर रही है। असम चुनाव में साथ न आने का असर अब राज्य की सत्ता में भी दिखने लगा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव आगे बढ़ता है, तो इसका सीधा असर सरकार की स्थिरता और फैसलों पर पड़ सकता है। खासकर तब, जब विपक्ष पहले से ही इन मतभेदों को मुद्दा बनाकर राजनीतिक बढ़त लेने की कोशिश में है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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