
Ranchi : झारखंड में नगर निकाय चुनाव प्रचार के दौरान सियासी तापमान बढ़ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने मेदिनीनगर में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बातचीत में दावा किया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भाजपा के साथ “मर्ज” होने जा रहा है और 15–20 दिनों में यह दिखाई देगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की “हरी झंडी” मिल चुकी है और चुनाव के बाद सरकार बदल सकती है।
त्रिपाठी के बयान के बाद कांग्रेस, झामुमो और भाजपा, तीनों दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं आईं। हालांकि, किसी भी दल ने ऐसे किसी औपचारिक प्रस्ताव या प्रक्रिया की पुष्टि नहीं की है।
कांग्रेस का खंडन: “बेबुनियाद और भ्रामक”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने त्रिपाठी के बयान को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि दूर-दूर तक ऐसी कोई बात नहीं है और यह दावा बेबुनियाद व भ्रामक है। कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि यह पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं है।
झामुमो की प्रतिक्रिया: “गंभीरता से लेने योग्य नहीं”
झामुमो के प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि त्रिपाठी न तो वर्तमान विधायक हैं, न सांसद और न ही किसी अहम पद पर हैं। उनके अनुसार, डालटनगंज में भाजपा विरोधी मत झामुमो के पक्ष में गोलबंद हो रहे हैं, जिससे कुछ लोग विचलित हैं। पांडेय ने आरोप लगाया कि यह बयान भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
भाजपा की प्रतिक्रिया: “कांग्रेस स्पष्ट करे”
प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने कहा कि इस पर कांग्रेस और झामुमो को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यह कांग्रेस का आधिकारिक बयान है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मंत्री भ्रम फैला रहे हैं।
मेदिनीनगर में समीकरण और बयान की पृष्ठभूमि
मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव में केएन त्रिपाठी की बेटी नम्रता त्रिपाठी मेयर पद पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार हैं। वहीं झामुमो ने भी अपने समर्थित उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। भाजपा समर्थित उम्मीदवार भी चुनावी दौड़ में है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस और झामुमो समर्थित उम्मीदवारों के बीच मुकाबले से भाजपा समर्थित उम्मीदवार को लाभ मिल सकता है। ऐसे में त्रिपाठी का बयान भाजपा विरोधी मतों के संभावित बंटवारे को रोकने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि यह विश्लेषण राजनीतिक समीकरणों पर आधारित है और इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी दल ने नहीं की है।
क्या बदलेगा सत्ता समीकरण?
वर्तमान में राज्य में गठबंधन सरकार है। किसी भी प्रकार के “मर्ज” या सत्ता परिवर्तन के लिए विधायकों का समर्थन, संवैधानिक प्रक्रिया और औपचारिक घोषणा आवश्यक होगी। फिलहाल यह बयान राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है।
निकाय चुनाव के नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा कि राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।