झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा एवं बाल विकास परियोजना पदाधकारी परीक्षा रद्द किए जाने के मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग ने झारखंड हाईकोर्ट में वक्त अपना जवाब दाखिल कर दिया है। जेपीएससी ने अपने जवाब में यह स्पष्ट किया है कि दोनों परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय राज्य सरकार का है, जिसमें आयोग के अनुसार सरकार को परिस्थितियों के आधार पर इस तरह का नीतिगत निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार है। दरअसल झारखंड से आयोग की सिविल सेवा परीक्षा और सीडीपीओ परीक्षा को राज्य सरकार ने रद्द कर दिया था, जिस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
संयुक्त सिविल परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ आशीष अक्षत ने याचिका दायर की थी, जबकि सीडीपीओ परीक्षा के मामले में सुभाष बोरमू ने भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल अपने जवाब में जेपीएससी ने कहा है कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है एवं सरकार परिस्थितियों के अनुसार परीक्षा को रद्द करने का फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है।
इसमें आयोग का यह भी कहना है कि परीक्षा रद्द करने संबंधी निर्णय सरकार का नीतिगत फैसला है। इन मामलों से पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जेपीएससी को प्रति जवाब दाखिल करने पर निर्देश दिया था, जिसके अनुपालन में आयोग ने दोनों मामलों में अपना जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दिया और इन मामलों की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।