नई दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट के सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने यह कहा कि शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में किया गया प्रदर्शन संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखना ही अति आवश्यक है लेकिन इसका अर्थ या नहीं की प्रदर्शन कार्यों पर बल प्रयोग किया जाए। CJI नहीं यह भी सवाल उठाया कि यदि स्थिति नियंत्रित से बाहर होने का खतरा था तो पुलिस के पास भीड़ प्रबंधन के बेहतर और काम हिंसक तरीके क्यों नहीं अपनाए।
यह मामला जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान, पुलिस कार्रवाई, लाठी चार्ज, हिरासत, मेट्रो स्टेशन बंद करने और इंटरनेट सेवाएं प्रभावित किए जाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। याचिका कर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की है।