Iran Israel Conflict Update : पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (Ali Khamenei) की मौत को लेकर बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। ईरानी मीडिया एजेंसियों ‘तसनीम’ और ‘फार्स’ ने तेहरान स्थित एक सरकारी परिसर पर हुए हमले में खामेनेई के निधन की पुष्टि का दावा किया है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और इजराइली अधिकारियों ने भी बमबारी में उनके मारे जाने की बात कही थी, जिसे प्रारंभिक चरण में ईरानी अधिकारियों ने “मनोवैज्ञानिक युद्ध” बताया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई है। हमले में उनके परिवार के कुछ सदस्यों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के प्रभावित होने की भी खबरें हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
यह भी पढ़ें – ईरान पर अमेरिका-इजराइल का अटैक, ईरानी रक्षामंत्री और 85 छात्राओं की मौत, तेहरान ने भी इजराइल-दुबई पर दागीं 400 मिसाइलें
सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान में स्थित एक प्रमुख सरकारी परिसर को निशाना बनाया गया। इजराइल की सेना Israel Defense Forces (IDF) ने पहले इसे रणनीतिक सैन्य कार्रवाई बताया था।
जवाब में Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि ईरान “निर्णायक प्रतिक्रिया” देगा और सबसे खतरनाक बदला लेगा। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ाया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सर्वोच्च नेतृत्व में अचानक बदलाव की पुष्टि होती है, तो ईरान की सैन्य और राजनीतिक रणनीति में तेज़ और आक्रामक बदलाव संभव है।
कराची में अमेरिकी काउंसिलेट पर हमला, 8 की मौत
कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर रविवार (1 मार्च 2026) को सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया, जिसमें इमारत के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की गई, खिड़कियां तोड़ी गईं और आग लगाने की कोशिश की गई। यह हिंसा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद भड़की, जिनकी अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मौत की पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने की है।
प्रदर्शनकारी, ज्यादातर शिया समुदाय से, अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगा रहे थे और दूतावास परिसर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने आंसू गैस, लाठीचार्ज और कुछ मामलों में फायरिंग का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया, जिसमें कम से कम आठ प्रदर्शनकारियों की मौत और कई घायल होने की रिपोर्ट है।
पुलिस ने एमटी खान रोड पर स्थिति नियंत्रित करने के लिए सख्त कार्रवाई की, जबकि सिंध के गृह मंत्री ने रिपोर्ट मांगी और सुरक्षा बढ़ाने के आदेश दिए। यह घटना मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का हिस्सा है, जहां ईरान ने जवाबी मिसाइल हमलों की धमकी दी है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने और हमलों की चेतावनी जारी की है।
यह भी पढ़ें – भाजपा के लिए खतरे की घंटी हैं नगर निकाय चुनाव के नतीजे, यूजीसी मुद्दे और गलत फैसलों से पार्टी नेतृत्व पर उठ रहे सवाल
सत्ता संरचना पर असर: आगे क्या?
अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर के निधन की स्थिति में “Assembly of Experts” नया नेता चुनती है।
ईरान की राजनीतिक संरचना ‘विलायत-ए-फकीह’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके तहत सुप्रीम लीडर के पास सैन्य, न्यायपालिका और विदेश नीति सहित व्यापक अधिकार होते हैं। ऐसे में उनके निधन से आंतरिक सत्ता संतुलन, सुधारवादी और कठोरपंथी धड़ों के बीच संघर्ष, तथा IRGC की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
खामेनेई कौन थे? – एक संक्षिप्त प्रोफाइल
अली हुसैनी खामेनेई का जन्म 1939 में मशहद में हुआ। उन्होंने धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ राजनीतिक सक्रियता में भी हिस्सा लिया। 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान वे अयातुल्ला खोमैनी के करीबी सहयोगियों में रहे।
1981 में वे ईरान के राष्ट्रपति बने और 1989 में खोमैनी के निधन के बाद सुप्रीम लीडर नियुक्त किए गए। उनके कार्यकाल में ईरान की सैन्य और पैरामिलिट्री संरचना मजबूत हुई और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ा। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का संरक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उनके शासन को कठोर बताते रहे हैं।
परमाणु और मिसाइल विवाद की पृष्ठभूमि
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल मुद्दा लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगियों का आरोप है कि ईरान की क्षमताएं क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करती हैं, जबकि तेहरान इसे अपनी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बताता है।
हालिया घटनाक्रम ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है, क्योंकि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में वार्ता की दिशा बदल सकती है।
यह भी पढें – आबकारी नीति केस में बड़ा फैसला: केजरीवाल-सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपी बरी
वैश्विक असर : तेल, कूटनीति और भारत
- तेल बाजार: पश्चिम एशिया में अस्थिरता से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव।
- समुद्री सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य पर निगरानी बढ़ी।
- भारत पर प्रभाव: ऊर्जा आपूर्ति और खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा अहम मुद्दा।
संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने संयम और संवाद का आह्वान किया है।
यदि ईरानी मीडिया के दावों की व्यापक और आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह केवल एक सैन्य घटना नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया की राजनीतिक दिशा बदलने वाला ऐतिहासिक क्षण हो सकता है। फिलहाल स्थिति अत्यंत संवेदनशील है और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।