रांची: बिहार के पूर्णिया से पढ़ाई का सपना लेकर रांची आए बीटेक के प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की मौत ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), रांची की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेलगांव स्थित संस्थान के हॉस्टल में शनिवार रात हुई इस घटना के बाद विद्यार्थियों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। छात्र न केवल संस्थान के निदेशक के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, बल्कि हॉस्टल की बुनियादी सुविधाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में सुधार को लेकर भी जवाब चाहते हैं।
सोमवार, 12 अक्टूबर को भी विद्यार्थियों का विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। छात्रों का कहना है कि आदित्य की मौत के बाद केवल शोक जताना पर्याप्त नहीं है। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
कमरे में अचेत मिले आदित्य, अस्पताल में मृत घोषित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार, 10 अक्टूबर की रात आदित्य के कमरे से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर उसके साथियों को चिंता हुई। कमरे का दरवाजा खोले जाने पर वह अंदर फंदे से लटका मिला। इसके बाद उसे बचाने की कोशिश की गई और अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आदित्य की मौत की खबर फैलते ही हॉस्टल में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते मामला संस्थान की व्यवस्था और प्रबंधन की जवाबदेही से जुड़ गया। विद्यार्थियों ने आपातकालीन परिस्थितियों में उपलब्ध सुविधाओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
फिलहाल, आदित्य की मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
एंबुलेंस और चिकित्सा सहायता में देरी का आरोप
विद्यार्थियों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि घटना के समय आदित्य को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। छात्रों के अनुसार, उसे बचाने के लिए सीपीआर देने की कोशिश की गई। इसके बाद अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था में भी देरी हुई।
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने दावा किया कि एंबुलेंस की चाबी खोजने में करीब 15 से 20 मिनट लग गए। उन्होंने एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर और दूसरी जरूरी जीवनरक्षक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने का आरोप भी लगाया है।
छात्रों ने हॉस्टल की लिफ्ट खराब होने और आपातकालीन स्थिति में मरीज को नीचे लाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और संस्थान में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। यही वजह है कि विद्यार्थी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
निदेशक और एकेडमिक डीन के इस्तीफे की मांग
आदित्य की मौत के बाद विद्यार्थियों ने संस्थान के प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि निदेशक डॉ. राजीव श्रीवास्तव और एकेडमिक डीन इस्तीफा दें। इसके अलावा, कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
विद्यार्थियों का विरोध केवल एक घटना तक सीमित नहीं है। वे हॉस्टल की बुनियादी सुविधाओं, चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस की उपलब्धता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
छात्रों की मांग है कि संस्थान में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद मिल सके। उनका कहना है कि हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी से प्रबंधन बच नहीं सकता।
बातचीत की कोशिश, लेकिन निदेशक से सीधे वार्ता चाहते हैं छात्र
सोमवार को संस्थान के चेयरमैन ने प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से बातचीत की कोशिश की। उन्होंने फैकल्टी के साथ चर्चा करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन छात्र निदेशक से सीधे बातचीत करने की मांग पर अड़े रहे।
विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी मांगों और सवालों का जवाब संस्थान के शीर्ष प्रबंधन को देना चाहिए। निदेशक के इस्तीफे और हॉस्टल की व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर धरना जारी है।
इस घटनाक्रम ने संस्थान के प्रबंधन और विद्यार्थियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रबंधन छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
पुलिस जांच में जुटी, मौत की वजह का इंतजार
पुलिस के अनुसार, आदित्य की मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है। शुरुआती जांच में परीक्षा से जुड़े दबाव की आशंका का उल्लेख किया गया है, लेकिन इसे मौत का स्थापित कारण नहीं माना जा सकता। मामले में जांच और पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की ओर से भी मामले का संज्ञान लिए जाने की जानकारी सामने आई है। आयोग ने छात्र की मौत, कथित चिकित्सा देरी और संभावित प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े पहलुओं की जांच की बात कही है।
आदित्य की मौत ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की अहमियत को सामने ला दिया है। जांच से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि घटना के समय क्या हुआ, सहायता पहुंचाने में कोई देरी हुई या नहीं और संस्थान की व्यवस्था में कहां कमी थी।
सबसे अहम सवाल यही है कि हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थान के पास पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं। इस सवाल का जवाब केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और ठोस कार्रवाई से ही मिल सकेगा।
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