सुप्रीम कोर्ट से हेमंत सोरेन को अंतरिम राहत, एमपी-एमएलए कोर्ट की कार्यवाही पर रोक

Anand Kumar
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Ranchi : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज शिकायत वाद पर रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) द्वारा लिए गए संज्ञान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने रांची की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है।

साथ ही अदालत ने ईडी (ED) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश के बाद निचली अदालत में आगे की प्रक्रिया स्थगित रहेगी। इसे मुख्यमंत्री के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है, हालांकि मामला अभी अंतिम निर्णय से दूर है।


सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ में सुनवाई

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई, जिसमें जस्टिस जॉयमंगल बागची भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री की ओर से अधिवक्ता प्रज्ञा सिंह बघेल ने पक्ष रखा। दलील दी गई कि रांची सिविल कोर्ट के सीजेएम द्वारा संज्ञान लिये जाने और उसके बाद एमपी-एमएलए कोर्ट में कार्यवाही शुरू करने की प्रक्रिया विधिसम्मत नहीं थी।

बहस के दौरान अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस की और विशेष अदालत की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।


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हाईकोर्ट से राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट में मिली सुनवाई

इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने एमपी-एमएलए कोर्ट के आदेश को निरस्त करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप ने इस मामले को नई कानूनी दिशा दे दी है।


कानूनी महत्व: अंतरिम राहत का अर्थ क्या?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई यह राहत अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि अंतरिम व्यवस्था है। इसका अर्थ है:

  • एमपी-एमएलए कोर्ट में फिलहाल कोई आगे की कार्रवाई नहीं होगी।
  • ED को अपने आरोपों और प्रक्रिया की वैधता पर जवाब दाखिल करना होगा।
  • अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि निचली अदालत की कार्यवाही जारी रहेगी या नहीं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सुप्रीम कोर्ट को प्रथम दृष्टया प्रक्रिया में त्रुटि प्रतीत होती है, तो यह मामले की दिशा बदल सकता है। लेकिन यदि ED अपने पक्ष को मजबूत तरीके से स्थापित करती है, तो रोक हट भी सकती है।


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राजनीतिक असर: राहत या अस्थायी विराम?

यह आदेश ऐसे समय आया है जब राज्य में राजनीतिक माहौल पहले से ही संवेदनशील है।

सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम राहत को सत्तारूढ़ पक्ष बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकता है। वहीं विपक्ष यह तर्क दे सकता है कि यह केवल अस्थायी रोक है, अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि एमपी-एमएलए कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपनाता रहा है। ऐसे में यह मामला न केवल झारखंड बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


आगे क्या?

अब सभी की नजर ED के जवाब और अगली सुनवाई पर होगी।

  • क्या सुप्रीम कोर्ट निचली अदालत की कार्यवाही को स्थायी रूप से निरस्त करेगा?
  • या केवल प्रक्रिया सुधार के निर्देश देकर मामला आगे बढ़ने देगा?
  • क्या यह मामला राजनीतिक नैरेटिव को प्रभावित करेगा?

फिलहाल इतना तय है कि एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर रोक से मुख्यमंत्री को तत्काल कानूनी राहत मिली है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी दूर है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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