गिरिडीह। झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच गिरिडीह पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबीता ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। अनिता लंबे समय से पारसनाथ, लुगू पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय थी।
अनिता का आत्मसमर्पण ऐसे समय हुआ है, जब हाल ही में उसके पति और 25 लाख रुपये के इनामी कुख्यात माओवादी अजय महतो उर्फ टाइगर को सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया है। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी का असर संगठन के कैडरों पर भी पड़ रहा है।
2009 में संगठन से जुड़ी, 2017 में जंगल में हुआ विवाह
बोकारो जिले के चतरोचट्टी थाना क्षेत्र के दोहड़ी जलगा टोली की रहने वाली अनिता किस्कू वर्ष 2009 में नारी मुक्ति संघ के माध्यम से माओवादी संगठन के संपर्क में आई थी। इसके बाद वह संतोष महतो, भवन महतो और पतीराम महतो जैसे माओवादी नेताओं के साथ सक्रिय रही।
वर्ष 2017 में उसने संगठन की परंपरा के अनुसार जंगल में कुख्यात माओवादी अजय महतो उर्फ टाइगर से विवाह किया। इसके बाद वह लगातार संगठन की गतिविधियों में शामिल रही और एरिया कमेटी सदस्य के पद तक पहुंच गई।
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कई नक्सली मामलों में रही वांछित
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अनिता किस्कू संगठन के लिए हथियार और विस्फोटक छिपाने, लेवी वसूली, ग्रामीणों में दहशत फैलाने तथा पुलिस और सुरक्षा बलों के खिलाफ कई हिंसक घटनाओं में सक्रिय भूमिका निभाती रही। उसके खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में कई गंभीर नक्सली मामले दर्ज हैं।
संगठन से क्यों टूटा मोह?
पूछताछ के दौरान अनिता ने बताया कि शुरुआत में वह संगठन की विचारधारा से प्रभावित होकर माओवादी बनी थी, लेकिन समय के साथ शीर्ष कमांडरों द्वारा निचले कैडरों के शोषण, ग्रामीणों के साथ मारपीट और निर्दोष लोगों पर अत्याचार से उसका मोहभंग हो गया।
उसने बताया कि लगातार पुलिस कार्रवाई और हाल ही में पति अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद उसने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।
“नई दिशा–एक नई पहल” से हुई प्रभावित
गिरिडीह पुलिस के अनुसार, अनिता किस्कू ने झारखंड सरकार की “नई दिशा–एक नई पहल” आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर बिना किसी दबाव के आत्मसमर्पण किया है।
पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने सक्रिय नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा और भटकाव का रास्ता छोड़ें तथा राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन की नई शुरुआत करें।
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