JSSC-CGL में कथित सेटिंग का मामला: सुधाकर यादव गिरफ्तार, अभ्यर्थियों से लेन-देन और 1200 अभ्यर्थियों को जुटाने की जांच

Anand Kumar
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देवघर। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के मामलों की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की टीम ने JSSC-CGL परीक्षा में कथित सेटिंग के मामले में सुधाकर यादव को देवघर से गिरफ्तार किया है। मोहनपुर थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस ने CID की टीम का सहयोग किया।

मोहनपुर थाना प्रभारी संदीप कृष्ण ने सुधाकर यादव की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। CID को मिली जानकारी के आधार पर मोहनपुर पुलिस के सहयोग से संयुक्त कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद CID की टीम उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले गयी, जहां मामले को लेकर उससे विस्तृत पूछताछ की जा रही है।

अभ्यर्थियों से पैसे लेकर कथित सेटिंग का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, सुधाकर यादव पर आरोप है कि वह JSSC-CGL परीक्षा में अभ्यर्थियों से आर्थिक लेन-देन कर उन्हें परीक्षा में पास कराने और नौकरी दिलाने के नाम पर कथित सेटिंग कराने में शामिल था।

जांच के दौरान करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों के साथ कथित लेन-देन या सेटिंग किए जाने की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क में सुधाकर यादव की वास्तविक भूमिका क्या थी, अभ्यर्थियों से कितनी रकम का लेन-देन हुआ और इसमें उसके अलावा कौन-कौन लोग शामिल थे, यह CID की आगे की जांच से स्पष्ट होगा।

CID अब उसके बैंक खातों, मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी खंगाल रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था या नहीं।

करीब 1200 अभ्यर्थियों को एक जगह जुटाने की भी जांच

मामले की जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। अलग-अलग जिलों के करीब 1200 अभ्यर्थियों को एक जगह जुटाकर परीक्षा से जुड़े सवाल-जवाब तैयार कराने और उन्हें रटाने की बात जांच एजेंसी के सामने आयी है।

हालांकि, इन अभ्यर्थियों को किसने जुटाया था, उन्हें किस उद्देश्य से सवाल-जवाब उपलब्ध कराए गए और इस पूरी कवायद का JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी से क्या संबंध था, इसकी जांच अभी जारी है।

CID इन तमाम कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 1200 अभ्यर्थियों को जुटाने की घटना और सुधाकर यादव के खिलाफ सामने आए आरोपों के बीच कोई सीधा संबंध था या नहीं।

2018 से रांची सचिवालय में लिपिक है सुधाकर यादव

बताया जा रहा है कि सुधाकर यादव वर्ष 2018 से रांची सचिवालय में लिपिक के पद पर कार्यरत है। सरकारी सेवा में रहते हुए प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े कथित नेटवर्क में उसकी भूमिका सामने आने के बाद CID अब उसके सरकारी और निजी संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।

जांच एजेंसी उसके बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। इसके अलावा मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह किन लोगों के संपर्क में था और अभ्यर्थियों तक उसकी पहुंच किस माध्यम से थी।

JSSC-CGL

CID कर रही है परीक्षा गड़बड़ी के नेटवर्क की पड़ताल

JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े मामले की जांच CID थाना कांड संख्या 01/2025 के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी का फोकस केवल एक व्यक्ति की भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।

इस क्रम में आर्थिक लेन-देन, अभ्यर्थियों से संपर्क, परीक्षा से पहले कथित तौर पर उपलब्ध कराए गए सवाल-जवाब और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी पर CID की कार्रवाई तेज

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के मामलों को लेकर CID की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। सोमवार को भी जांच एजेंसी ने प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारियां की हैं।

CID की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, JSSC-CGL से जुड़े मामले में एक अन्य आरोपी दिलीप कुमार पासवान की गिरफ्तारी भी की गयी है। पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के केंदा क्षेत्र के रहने वाले करीब 41 वर्षीय दिलीप कुमार पासवान की भूमिका जांच के दौरान JSSC की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाने के मामले में सामने आने की बात CID ने कही है।

वहीं, JPSC से जुड़े एक अलग मामले में रांची के एक कोचिंग सेंटर संचालक संजीत कुमार को भी CID ने गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, जांच में उसकी भूमिका कथित एजेंट के तौर पर सामने आयी है। दोनों मामलों में गिरफ्तार आरोपितों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इस तरह JSSC-CGL से जुड़े मामलों में CID की जांच अब कई संदिग्ध भूमिकाओं और संभावित नेटवर्क तक पहुंचती दिखाई दे रही है। सुधाकर यादव की गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल, बैंक खातों और संपर्कों की जांच से इस मामले में आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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