रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितता के मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल खयांग्ते को अदालत से राहत नहीं मिली है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
सिविल कोर्ट के अधिवक्ता संजय कुमार के मुताबिक, जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया है।
बचाव पक्ष ने कहा- ठोस साक्ष्य नहीं
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एल खयांग्ते की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने पक्ष रखा।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि खयांग्ते के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। जांच एजेंसी की ओर से की गई छापेमारी के दौरान भी उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। ऐसे में उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
CID ने जमानत का किया विरोध
CID ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए मामले को गंभीर बताया। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी TDPL को काम दिए जाने में एल खियांग्ते की भूमिका थी।
CID का आरोप है कि TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही थी और इसकी जानकारी खियांग्ते को थी। इसके बावजूद उन्होंने इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि एल खयांग्ते ने TDPL से कथित तौर पर करीब 2 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर लिए। CID का कहना है कि मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और खयांग्ते को जमानत मिलने की स्थिति में जांच प्रभावित हो सकती है।
कांड संख्या 16/2026 में 24 से ज्यादा गिरफ्तारियां
JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इसी मामले की जांच के दौरान एल खियांग्ते को गिरफ्तार किया गया था।
CID ने उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की थी। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में अब तक 24 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। JPSC में लंबे समय तक कार्यरत रहीं श्वेता गुप्ता और अभय तिवारी समेत कई आरोपी भी न्यायिक हिरासत में हैं।
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