कुडू-उदयपुरा बाइपास निर्माण को लेकर वायरल कथित वॉइस रिकॉर्ड में कंपनी को बातचीत के लिए आगे आने की चेतावनी; मजदूरों को नुकसान नहीं पहुंचाने की बात, पुलिस जांच से साफ होगी ऑडियो की सच्चाई
लोहरदगा: सड़क निर्माण कंपनियों से कथित रंगदारी और धमकी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। लोहरदगा जिले में कुडू से उदयपुरा बाइपास तक चल रहे सड़क निर्माण कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर एक कथित वॉइस रिकॉर्ड वायरल हो रहा है। इसमें निर्माण कंपनी को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने का दावा किया जा रहा है।
वायरल ऑडियो में कथित तौर पर ‘राहुल सिंह गैंग’ के नाम से धमकी दी गई है। इसमें कहा गया है कि अगर 48 घंटे के भीतर कंपनी के लोग बातचीत के लिए आगे नहीं आते हैं, तो सड़क निर्माण से जुड़े अधिकारियों, पदाधिकारियों और कर्मचारियों को निशाना बनाया जाएगा।
हालांकि, वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इसमें किए गए दावों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
48 घंटे में बातचीत का अल्टीमेटम
सोशल मीडिया पर वायरल कथित ऑडियो में निर्माण कंपनी को बातचीत के लिए आगे आने की चेतावनी दी गई है। कथित रिकॉर्ड में कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर बातचीत नहीं होने पर निर्माण कार्य से जुड़े जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ‘एक्शन’ लिया जाएगा।
ऑडियो सामने आने के बाद सड़क निर्माण परियोजना से जुड़े लोगों में चिंता का माहौल बताया जा रहा है।
मजदूरों को नुकसान नहीं पहुंचाने की बात
वायरल कथित रिकॉर्डिंग में मजदूरों को लेकर अलग रुख अपनाए जाने की बात भी सामने आ रही है। इसमें कथित तौर पर कहा गया है कि मजदूरों को नुकसान पहुंचाना मकसद नहीं है।
यानी कथित धमकी में सड़क निर्माण में काम करने वाले मजदूरों के बजाय कंपनी से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को निशाने पर लेने की बात कही गई है।
रंगदारी के साये में सड़क निर्माण?
लोहरदगा और आसपास के इलाकों में सड़क निर्माण परियोजनाओं को लेकर पहले भी रंगदारी और आपराधिक गिरोहों की धमकियों के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में इस वायरल ऑडियो ने सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कंपनियों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि वायरल ऑडियो के पीछे वास्तव में कौन है और क्या इसका संबंध किसी आपराधिक गिरोह से है? ऑडियो की आवाज, उसमें किए गए दावे और धमकी के पीछे की मंशा की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो पाएगी।
पुलिस जांच के बाद खुलेगा पूरा राज
फिलहाल वायरल ऑडियो के आधार पर किसी व्यक्ति या गिरोह की संलिप्तता को अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता। पुलिस यदि मामले की जांच करती है तो रिकॉर्डिंग के स्रोत, आवाज की पहचान, निर्माण कंपनी से संपर्क और कथित धमकी के पीछे के नेटवर्क की जांच अहम होगी।
वायरल ऑडियो ने हालांकि कुडू-उदयपुरा बाइपास सड़क निर्माण परियोजना की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है।
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