आरक्षण पर चिराग पासवान का बड़ा बयान, बोले- ‘जब तक जिंदा हूं, आरक्षण को खतरा नहीं’

Anand Kumar
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भारत में आरक्षण व्यवस्था को लेकर चल रही बहस एवं दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी राम विलास के प्रमुख चिराग पासवान ने एक बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने यह साफ कहा है कि जब तक वे जिंदा हैं, तब तक न आरक्षण को खतरा है और न ही संविधान को।

चिराग पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पुराने वीडियो को साझा करते हुए आरक्षण के मुद्दे पर अपनी पार्टी का रुख को दोहराते हुए यह कहा है कि आरक्षण किसी और से दी गई खैरात नहीं बल्कि संविधान से मिला अधिकार है। उनका यह स्पष्ट कहना है कि आरक्षण को खत्म करने की बात तो दूर इसकी समीक्षा भी उनकी पार्टी को स्वीकार नहीं हुए।

चिराग पासवान ने अपने पुराने संसद संबोधन का हवाला देते हुए यह कहा कि उनकी और लोक जनशक्ति पार्टी की सोच आरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्ट है एवं सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी पार्टी प्रतिबद्ध है। उनका कहना है कि आरक्षण को लेकर किसी भी तरह का भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए एवं संविधान से मिले इस अधिकार को कमजोर करने या उसमें बदलाव करने की कोशिश भी उनकी पार्टी नहीं करने देगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री की मौजूदगी वाले एक कार्यक्रम में भी आरक्षण और संविधान को लेकर अपनी बात रखी थी, जिसमें कहा था कि जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, तब तक संविधान और आरक्षण को बिल्कुल भी खतरा नहीं है। उनका कहना है कि जब तक चिराग पासवान जिंदा हैं, तब तक भी आरक्षण और संविधान पर कोई आँच नहीं आएगी।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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