रांची। जेपीएससी और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति को रद्द करने के सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट की रोक के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया और छात्रों के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए उन्हें भ्रम में रखा।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने दो दिन पहले ही आशंका व्यक्त कर दी थी कि सरकार का फैसला अदालत में टिक नहीं पाएगा और उस पर स्थगन आदेश आ सकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों के प्रति सरकार की नीयत शुरू से ही ठीक नहीं रही है।
‘बिना कानूनी प्रक्रिया के जारी किया तुगलकी फरमान’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिस तरह सरकार ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए एक झटके में JPSC-JSSC की नियुक्तियों और परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की, उसी समय उन्होंने सवाल उठाया था कि यह फैसला हाईकोर्ट में टिक नहीं पाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार से कैविएट दाखिल करने का आग्रह भी किया गया था, ताकि मामला न्यायालय में पहुंचने पर सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले और एकतरफा स्थगन आदेश की स्थिति न बने।
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राहुल गांधी और हेमंत सोरेन पर लगाया राजनीतिक साजिश का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और हेमंत सोरेन ने सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत छात्र आंदोलन को समाप्त करने के लिए परीक्षा रद्द करने का ढोंग रचा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों को कानूनी विशेषज्ञों के साथ बातचीत के लिए बुलाया और वार्ता का भरोसा दिया। इसके बाद सरकार खुद ही पीछे हट गई और बंद कमरे में परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला कर दिया।
मरांडी के मुताबिक, छात्रों को यह भरोसा दिलाया गया कि उनकी मांगों पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन बाद की घटनाओं ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए।
‘छात्र राजनीतिक साजिश का शिकार हो गए’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने पहले ही सरकार से कैविएट दाखिल करने का आग्रह किया था। उनके मुताबिक, सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक लगने के बाद उनकी आशंका सही साबित हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों को भ्रम में रखकर आंदोलन समाप्त कराया और राजनीतिक साजिश की जानकारी के अभाव में छात्र भी इस पूरे घटनाक्रम का शिकार हो गए।
‘गलत तरीके से बहाल लोगों को बचाना चाहती है सरकार’
बाबूलाल मरांडी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार गलत तरीके से बहाल किए गए लोगों और उन्हें गलत तरीके से बहाल करने में शामिल जिम्मेदार लोगों को बचाना चाहती है।
उन्होंने दोहराया कि उनकी मांग शुरू से ही पूरे मामले की CBI जांच कराने की रही है। उनका कहना है कि जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि गलत तरीके से किन लोगों की नियुक्ति हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन अभ्यर्थियों का चयन पूरी पारदर्शिता और सही प्रक्रिया के तहत हुआ है, उन्हें किसी भी परिस्थिति में नुकसान नहीं होना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
जेपीएससी और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति समेत परीक्षाओं एवं नियुक्तियों को लेकर सरकार के फैसले के बाद छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी थी। अब हाईकोर्ट की रोक के बाद इस पूरे मामले पर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है, जबकि आगे न्यायालय में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं को लेकर अंतिम स्थिति क्या बनती है।
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