रांची: JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। आंदोलन के बीच आज दोपहर 2 बजे सरकार और छात्रों के बीच महत्वपूर्ण वार्ता होने वाली है। वार्ता से ठीक पहले झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सवालों की बौछार कर दी है।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए JSSC-CGL विवाद में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार कोर्ट के आदेश को लेकर JSSC-CGL को रद्द करने में कानूनी मजबूरी बता रही है, तो संबंधित अधिकारियों को पद से हटाने और उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने में कैसी मजबूरी है।
प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता पर कार्रवाई क्यों नहीं?
बाबूलाल मरांडी ने JSSC के प्रभारी चेयरमैन IAS प्रशांत कुमार और सचिव सुधीर गुप्ता पर कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है।
उनका कहना है कि JSSC-CGL को लेकर लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। ऐसे में यदि परीक्षा को रद्द करने के मामले में सरकार खुद को कोर्ट के आदेश के कारण बाध्य बता रही है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को पद से हटाने, FIR दर्ज करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में सरकार को क्या रोक रहा है?
बाबूलाल ने सरकार से आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
नीरज सिन्हा पर मेहरबानी क्यों?
नेता प्रतिपक्ष ने JSSC के पूर्व अध्यक्ष नीरज सिन्हा को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि JPSC मामले में इस्तीफा देने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, तो JSSC मामले में इस्तीफा देने वाले नीरज सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
बाबूलाल ने दोनों मामलों में सरकार के कथित अलग-अलग रवैये पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या दोनों अधिकारियों की सेवा पृष्ठभूमि—IAS और IPS—की वजह से कार्रवाई में अंतर किया जा रहा है। इससे पहले भी उन्होंने JSSC से जुड़े मामलों में तत्कालीन अधिकारियों नीरज सिन्हा और सुधीर गुप्ता की भूमिका की जांच की मांग की थी।
10-12 नामों की जांच और FIR की मांग
बाबूलाल मरांडी ने कथित तौर पर घूस देकर नौकरी हासिल करने से जुड़े वायरल हो रहे 10-12 नामों की भी जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ है, तो ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि छात्रों की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब केवल बातचीत के जरिए आंदोलन खत्म कराने से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई के जरिए दिया जाना चाहिए।
JPSC-JSSC मामलों की CBI जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने JPSC और JSSC से जुड़े विवादित मामलों की जांच CBI को सौंपने की मांग भी दोहराई है।
छात्रों की प्रमुख मांगों में भी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करना और पूरे मामले की CBI जांच शामिल है।
ऐसे में सरकार और छात्रों के बीच होने वाली आज की वार्ता में इन मुद्दों पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आज दोपहर 2 बजे सरकार और छात्रों के बीच वार्ता
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच आज दोपहर 2 बजे वार्ता प्रस्तावित है।
छात्रों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया है कि वे सरकार के बुलावे पर वार्ता में शामिल होंगे। छात्रों का कहना है कि बातचीत के जरिए ही समाधान का रास्ता निकाला जा सकता है। इस बार छात्रों की ओर से लीगल एक्सपर्ट भी वार्ता में मौजूद रहेंगे।
JSSC-CGL को रद्द करने की मांग के कानूनी पहलुओं पर भी बैठक में चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में यह वार्ता पहले की बातचीत की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी
हालांकि छात्रों ने बातचीत का रास्ता खुला रखा है, लेकिन उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है।
छात्रों ने मांगें नहीं माने जाने की स्थिति में 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव का ऐलान कर रखा है। रविवार को आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत गठबंधन के नेताओं का पुतला दहन कर अपना विरोध जताया था।
ऐसे में आज की वार्ता सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि बातचीत में छात्रों की मांगों पर कोई ठोस आश्वासन या समाधान निकलता है, तो आंदोलन को शांत करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। वहीं, वार्ता विफल रहने पर 20 अगस्त का कार्यक्रम और बड़ा रूप ले सकता है।
अब नजर वार्ता के नतीजे पर
फिलहाल JSSC-CGL विवाद तीन स्तरों पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है—सड़क पर छात्रों का आंदोलन, सरकार के साथ बातचीत और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप।
एक तरफ सरकार छात्रों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और CBI जांच की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या आज की वार्ता से JSSC-CGL विवाद का कोई कानूनी रास्ता निकलेगा? क्या सरकार छात्रों की मांगों पर ठोस कदम उठाएगी? और क्या 20 अगस्त का मुख्यमंत्री आवास घेराव टल पाएगा?
इन सवालों के जवाब आज होने वाली वार्ता के बाद सामने आने की उम्मीद है।
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