रांची: मोरहाबादी मैदान में आयोजित दो दिवसीय झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का उद्घाटन रविवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज, नगाड़ा फॉर्मेशन, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा ने झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की झलक पेश की। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी शिविर, वृत्तचित्र फिल्म महोत्सव, इमर्सिव जोन और चित्रकला शिविर का भी उद्घाटन किया।
महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JPSC-JSSC परीक्षा और छात्रों के आंदोलन को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ युवा और छात्र अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार खुले मन से उनकी बातें सुन रही है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझने का प्रयास कर रही है।
‘गड़बड़ी सामने आई है, जांच होगी और न्याय मिलेगा’
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके संज्ञान में गड़बड़ी सामने आई है। इसकी जांच होगी और युवाओं को न्याय मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने गड़बड़ी की है, उन्हें कठोर से कठोर सजा दी जाएगी।
हेमंत सोरेन ने युवाओं से विश्वास बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उनके साथ गलत नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता के प्रति संवेदनशील होकर काम करने की है।
इसे भी पढ़ें – JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के बीच JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा, सरकार-छात्र वार्ता बेनतीजा; 10 अगस्त को विधानसभा मार्च
‘हर समस्या का समाधान संवाद से संभव’
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत और संवाद से संभव है। उन्होंने युवाओं को राजनीतिक रूप से दिग्भ्रमित होने से बचने की सलाह दी। उनका कहना था कि युवाओं को अपनी बात सरकार के सामने स्पष्टता और निर्भीकता से रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार अब केवल आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से युवाओं की बातें सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घर बैठे अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर चिंतित युवाओं तक भी पहुंचने का प्रयास करेगी। इसके लिए संवाद का माध्यम बनाया गया है।
‘पारदर्शिता के साथ होगा न्याय’
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे खुद को युवाओं से अलग नहीं मानते। युवाओं की भावनाएं और उनकी चिंताएं सरकार की भी चिंता हैं।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक जिम्मेदारी के पद पर रहते हुए वे युवाओं को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनके साथ पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय होगा और न्याय केवल होगा ही नहीं, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देगा।
आदिवासी संस्कृति और पहचान पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह झारखंड की गौरवशाली विरासत, संघर्ष और पहचान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत है।
मोरहाबादी मैदान में आयोजित महोत्सव में झारखंड के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी समुदायों के लोग, कलाकार और कारीगर शामिल हुए हैं। यहां आदिवासी कला एवं शिल्प, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प, जनजातीय जीवन-पद्धति, लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
‘झारखंड केवल राज्य नहीं, वीरों की भूमि’
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि वीरों की भूमि है। यहां के वीर पूर्वजों ने अपने अधिकार, अस्मिता और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। उन्होंने जल, जंगल और जमीन को आदिवासी समाज के जीवन और अस्तित्व से जुड़ा बताया।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को गलत संदेशों और दिग्भ्रमित करने वाले प्रयासों से सजग रहने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समस्याओं का समाधान बातचीत से किया जा सकता है और अपने ही लोगों के साथ लाठी-डंडे के बल पर किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
राज्यपाल समेत कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में मंत्री राधा कृष्ण किशोर, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक अमित महतो, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल, अपर मुख्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी समेत राज्य सरकार के कई अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
यह भी पढ़ें – भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को समर्पित भव्य जतरा, मंत्री चमरा लिंडा ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना