झारखंड की राजधानी रांची में स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में योग और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहल की शुरुआत की गई है। मंगलवार 14 जुलाई को रिम्स के न्यू एकेडमिक ब्लॉक की पांचवी मंजिल पर अत्यधिक योग लाभ का उद्घाटन किया गया। साथ ही, थायराइड विकारों पर योग और प्राणायाम की परवाह का वैज्ञानिक अध्ययन की भी शुरुआत की गई। यह बहुकेंद्रीय (मल्टीसेंटर) शोध केवल रिम्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि झारखंड के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी संचालित करने की फैसला भी ली गई है।
इस शोध के तहत प्रतिभागियों को अगले 2 महीने तक नियमित रूप से योग और प्राणायाम करवाया जाएगा जिससे थायराइड ग्रंथि तथा उससे जुड़े विभिन्न स्वास्थ्य मानकों प्रयोग के प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन होगा। इस शोध का उद्देश्य यह भी है कि नियमित योग और प्राणायाम थायराइड रोगों के उपचार और मरीजों के स्वास्थ्य में कितना सकारात्मक योगदान दे सकते हैं यह पता चलेगा।
रिम्स के निदेशक प्रो. डॉ. डी.के. सिन्हा ने कहा कि योग केवल स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का विशेष माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस शोध से भविष्य में थायरॉयड रोगों के उपचार में योग की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रमाण मिल सकते हैं, जिससे मरीजों के बेहतर इलाज का मार्ग प्रशस्त होगा।
कार्यक्रम में रिम्स के निदेशक प्रो. डॉ. डी.के. सिन्हा, डीन प्रो. डॉ. राजीव मिश्रा, फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मैरी पुष्पा बाड़ा, बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संतोष कुमार समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक, फैकल्टी सदस्य, शोधकर्ता और स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।