दिल्ली के राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में मंत्री दीपिका पांडे ने उठाए कई अहम मुद्दे

Anand Kumar
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नई दिल्ली/रांची। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में झारखंड सरकार ने ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। राज्य की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सम्मेलन में महात्मा गांधी के नाम पर नई ग्रामीण विकास योजना शुरू करने, मनरेगा के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाने, लंबित मनरेगा भुगतान जारी करने और मजदूरी दर में वृद्धि सहित कई सुझाव केंद्र सरकार के समक्ष रखे।

दो दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन झारखंड की ओर से प्रस्तुत प्रेजेंटेशन में मंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल आधारभूत संरचना तैयार करना नहीं, बल्कि गांवों में रोजगार, सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।

महात्मा गांधी के नाम से शुरू हो नई योजना

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का योगदान ऐतिहासिक रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार को महात्मा गांधी के नाम से नई जनहितकारी ग्रामीण विकास योजना शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गांधी जी के नाम को ग्रामीण विकास की मुख्यधारा में बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

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मनरेगा में 125 दिन रोजगार के लिए बजट पर उठाया सवाल

सम्मेलन में मंत्री ने मनरेगा के तहत 100 दिनों के बजाय 125 दिन रोजगार देने की घोषणा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इसके लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में मनरेगा के बजट में लगातार कमी आई है। ऐसे में अतिरिक्त रोजगार दिवस देने की घोषणा तभी सार्थक होगी, जब राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहायता मिले।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 की लागत साझेदारी वाले मॉडल से झारखंड जैसे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ेगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाने की मांग

दीपिका पांडेय सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर दो लाख रुपये करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान लागत में गुणवत्तापूर्ण आवास बनाना लाभुकों के लिए कठिन होता जा रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने मजबूत फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर वाले आवासों के निर्माण का प्रस्ताव रखा, ताकि कम समय में बेहतर गुणवत्ता वाले घर तैयार किए जा सकें। उन्होंने लाभुकों को एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था करने का भी सुझाव दिया, जिससे निर्माण कार्य में होने वाली देरी और प्रशासनिक बाधाओं को कम किया जा सके।

मंत्री ने अबुआ आवास योजना के तहत मनरेगा से 90 दिनों की मजदूरी भुगतान की व्यवस्था करने की भी मांग रखी।

मनरेगा के लंबित भुगतान का मुद्दा फिर उठा

सम्मेलन में झारखंड सरकार ने मनरेगा के तहत केंद्र सरकार पर लंबित भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। मंत्री ने कहा कि राज्य का लगभग 900 करोड़ रुपये का मटेरियल मद भुगतान अभी भी लंबित है, जिससे ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान मनरेगा ग्रामीण परिवारों के लिए सबसे बड़ा रोजगार का माध्यम साबित हुआ था, इसलिए लंबित राशि का शीघ्र भुगतान जरूरी है।

न्यूनतम मजदूरी 433 रुपये करने की मांग

दीपिका पांडेय सिंह ने बढ़ती महंगाई का हवाला देते हुए मनरेगा मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 433 रुपये प्रतिदिन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान मजदूरी दर आज की आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।

वर्तमान में झारखंड में मनरेगा मजदूरों को 282 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है, जिसमें केंद्र सरकार का 255 रुपये तथा राज्य सरकार का 27 रुपये का अंशदान शामिल है।

ग्रामीण उद्योगों से महिलाओं को मिलेगा नया अवसर

सम्मेलन में मंत्री ने झारखंड में ग्रामीण उद्योगों के विकास पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी लगभग 32 लाख महिलाएं राज्य में आजीविका और उद्यमिता का नया मॉडल प्रस्तुत कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए तथा उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार तक पहुंच सुनिश्चित की जाए, तो झारखंड की महिलाएं आर्थिक परिवर्तन की नई मिसाल बन सकती हैं।

मंत्री ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत आम उत्पादन की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड के आम की मांग अब दुबई, लंदन और इटली जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच चुकी है। वहीं स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार पलाश और अदिवा ब्रांड के उत्पाद भी तेजी से पहचान बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार लगभग 15 लाख नोटबुक जल्द ही स्कूली छात्रों तक पहुंचाई जाएंगी।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड द्वारा दिए गए कई सुझावों पर सकारात्मक पहल का भरोसा भी दिलाया।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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