Jamshedpur : जमशेदपुर में लगातार लेट चल रही यात्री ट्रेनों को लेकर जनाक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। टाटानगर रेलवे स्टेशन पर आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने रेलवे प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार नहीं हुआ, तो जनता को मजबूर होकर मालगाड़ियों को रोकने जैसे कदम उठाने पड़ेंगे।
अब यह आंदोलन सामूहिक, बनेगी 21 लोगों की समिति
धरना को संबोधित करते हुए सरयू राय ने कहा कि शुरुआत उन्होंने अकेले की थी, लेकिन देखते ही देखते यह मुद्दा जनआंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि मारवाड़ी सम्मेलन, चेंबर ऑफ कॉमर्स, आजसू, विश्व हिंदू परिषद समेत कई संगठनों ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि अब यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं रही, बल्कि सामूहिक संघर्ष बनेगी। इसके लिए जल्द ही 20-21 लोगों की एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति आंदोलन को आगे बढ़ाएगी और जरूरत पड़ने पर दिल्ली जाकर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और रेल मंत्री से मुलाकात भी करेगी।
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तीन से पांच साल इंतजार नहीं, तुरंत समाधान की मांग
सरयू राय ने रेलवे के उस तर्क को खारिज किया जिसमें सुधार के लिए लंबी अवधि की योजनाओं का हवाला दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे अधिकारी बताते हैं कि कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है और इसमें 3 से 5 साल का समय लगेगा, लेकिन आम जनता इतनी लंबी अवधि तक इंतजार नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके कारण यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

चार से दस घंटे की देरी, यात्रियों की बढ़ी परेशानी
धरने के दौरान यात्रियों की समस्याओं का विस्तार से जिक्र किया गया। बताया गया कि टाटानगर आने-जाने वाली अधिकांश ट्रेनें रोजाना 3 से 5 घंटे की देरी से चल रही हैं और कई मामलों में यह देरी 7 से 10 घंटे तक पहुंच रही है। एक उदाहरण देते हुए कहा गया कि एक ट्रेन चार घंटे तक एक ही स्थान पर खड़ी रही, जबकि इस दौरान आठ मालगाड़ियों को आगे निकाल दिया गया। इस स्थिति में यात्रियों को दूरदराज के इलाकों में बिना किसी सुविधा के फंसे रहना पड़ता है।
मजदूर, छात्र और मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित
इस लेटलतीफी का असर सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की आजीविका पर भी पड़ रहा है। मजदूर समय पर काम पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और मरीजों को इलाज के लिए समय पर पहुंचने में परेशानी हो रही है। सरयू राय ने कहा कि चाकुलिया और बहड़ागोड़ा जैसे क्षेत्रों से मजदूर अब टाटानगर आना कम कर रहे हैं, क्योंकि ट्रेनें भरोसेमंद नहीं रह गई हैं।

व्यापारियों का तर्क, यात्री ट्रेनों को मिले प्राथमिकता
धरना में शामिल व्यापारियों ने कहा कि मालगाड़ियों के कुछ घंटे लेट होने से व्यापार पर बड़ा असर नहीं पड़ता, लेकिन यात्री ट्रेनों की देरी सीधे आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। उन्होंने रेलवे से मांग की कि यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाए और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित किया जाए।
चक्रधरपुर मंडल की कार्यप्रणाली पर सवाल
सरयू राय ने चक्रधरपुर रेल मंडल पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां विकास कार्य अन्य मंडलों की तुलना में काफी पीछे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संचालन व्यवस्था में खामियां हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
नई ट्रेन का दावा भ्रामक, पुरानी सेवाओं को बताया जा रहा नया
रेलवे द्वारा नई ट्रेनों के संचालन के दावे पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान बंद हुई पुरानी ट्रेनों को दोबारा चलाकर उन्हें नई ट्रेन बताया जा रहा है। उनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों में वंदे भारत को छोड़कर कोई वास्तविक नई ट्रेन शुरू नहीं हुई है।
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धरना स्थल बदलने पर बढ़ा विवाद, कार्यकर्ताओं में नाराजगी
धरना स्थल को लेकर भी विवाद सामने आया। तय स्थल को रेलवे प्रशासन ने अचानक बदल दिया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई। रातों-रात लगाए गए बैनर और कारपेट हटा दिए गए और सुबह वहां पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इसके बाद सरयू राय के निर्देश पर नया स्थल तय कर धरना शुरू किया गया।
आंदोलन के विस्तार का संकेत, रेलवे को चेतावनी
धरना शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन इसने रेलवे प्रशासन को स्पष्ट संदेश दे दिया कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। सरयू राय ने संकेत दिया कि अगला कदम सिर्फ धरना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रेलवे संचालन को प्रभावित करने वाले कदम भी उठाए जा सकते हैं।