5 राज्यों में विधानसभा चुनाव का आज बजेगा बिगुल: शाम 4 बजे चुनाव आयोग करेगा तारीखों का ऐलान; दांव पर दिग्गजों की साख

Anand Kumar
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New Delhi : देश में एक बार फिर चुनावी महासंग्राम की शुरुआत होने जा रही है। चुनाव आयोग (ECI) आज शाम 4 बजे पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान करेगा। इन सभी पांच राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल इसी साल मई में खत्म हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में चुनाव दो-दो चरणों (Phases) में कराए जा सकते हैं, जबकि केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान संपन्न होने की उम्मीद है।

बड़ा उलटफेर: मतदाता सूची से कटे करोड़ों नाम (SIR रिपोर्ट)

चुनावों की घोषणा से ठीक पहले, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। इन पांच राज्यों में लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए हैं:

  • तमिलनाडु (सबसे ज्यादा): यहां करीब 4 महीने चली SIR प्रक्रिया के बाद 74 लाख से ज्यादा लोगों के नाम हटाए गए हैं। अब राज्य में 5.67 करोड़ मतदाता बचे हैं।
  • पश्चिम बंगाल: दूसरे नंबर पर बंगाल है, जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम लिस्ट से कटे हैं।
  • इसके बाद केरल (8 लाख), असम (2 लाख – SR के जरिए) और पुडुचेरी (77 हजार) का नंबर आता है।

5 राज्यों का ‘सियासी चक्रव्यूह’: किसके सामने क्या है चुनौती?

इन पांच राज्यों के चुनाव सिर्फ सत्ता का खेल नहीं हैं, बल्कि कई दिग्गजों के राजनीतिक भविष्य का फैसला भी करेंगे:

1. पश्चिम बंगाल: ममता का ‘चौका’ या बीजेपी का ‘कमल’? बंगाल में पिछले 14 साल से सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने बीजेपी मुख्य और सबसे आक्रामक चुनौती है। अगर टीएमसी (TMC) 2026 के इस रण को जीत लेती है, तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने वाली देश की पहली महिला बन जाएंगी (जयललिता 5 बार सीएम रहीं, लेकिन उनके कार्यकाल लगातार नहीं थे)।

2. असम: बीजेपी की हैट्रिक पर नजर, विपक्ष का चक्रव्यूह असम में पिछले 10 साल से बीजेपी की सरकार है और पार्टी 126 में से 100+ सीटें जीतकर हैट्रिक लगाने की तैयारी में है। पीएम मोदी पिछले 6 महीने में 3 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। घुसपैठ और असमिया पहचान यहाँ के मुख्य मुद्दे हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने 10 पार्टियों (वामपंथी व क्षेत्रीय दल) के साथ गठबंधन किया है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की पार्टी (JMM) भी 40 सीटों पर चुनाव लड़कर यहाँ के समीकरणों को उलझाने की तैयारी कर रही है।

3. तमिलनाडु: 60 साल का सूखा और सुपरस्टार की एंट्री यह देश का इकलौता राज्य है जहां पिछले 60 सालों से कांग्रेस या बीजेपी जैसी राष्ट्रीय पार्टी अपनी सरकार नहीं बना पाई है। सत्ता हमेशा डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के बीच घूमती रही है। इस बार बीजेपी, AIADMK के साथ गठबंधन की जुगत में है। वहीं, तमिल सुपरस्टार ‘विजय’ की नई पार्टी (TVK) के मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है।

4. केरल: लेफ्ट का इकलौता किला और बीजेपी की सेंधमारी केरल पूरे देश में वामपंथियों (Left) का इकलौता बचा हुआ गढ़ है। यहाँ हर पांच साल में सत्ता बदलने का ट्रेंड था, जिसे 2021 में वाम मोर्चे (LDF) ने तोड़ दिया था। कांग्रेस इस बार ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) के सहारे वापसी की उम्मीद कर रही है। वहीं, बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट और दिसंबर 2025 में त्रिवेंद्रम नगर निगम जीतकर पहली बार यहाँ अपना मजबूत खाता खोला है।

5. पुडुचेरी: सत्ता की वापसी की जद्दोजहद 2021 में कांग्रेस सरकार के गिरने के बाद यहाँ AINRC और बीजेपी गठबंधन ने सत्ता संभाली थी। यह पहला मौका था जब पुडुचेरी में बीजेपी सीधे सत्ता में भागीदार बनी। इस बार कांग्रेस, DMK के साथ मिलकर सरकार गिरने के मुद्दे को भुनाने और वापसी करने की कोशिश कर रही है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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