किडनी की बीमारियों से बचाएगी ‘EAT-Lancet’ डाइट: भारत में 13 करोड़ से ज्यादा मरीज, जानें क्या है यह जादुई फूड मॉडल

Anand Kumar
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Jan-man Health : भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ते खान-पान के बीच ‘क्रॉनिक किडनी डिजीज’ (CKD) भारत में एक बड़ी चुनौती बन गई है। द लैंसेट’ की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 तक भारत में इसके मरीजों की संख्या 13.8 करोड़ पार कर चुकी है। लेकिन हाल ही में ‘कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल’ में प्रकाशित एक स्टडी ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘EAT-Lancet डाइट’ को अपनाकर न सिर्फ किडनी की सेहत सुधारी जा सकती है, बल्कि पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है।

क्या है EAT-Lancet डाइट?

इसे ‘प्लैनेटरी हेल्थ डाइट’ भी कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो यह एक फ्लेक्सिटेरियन डाइट है, जिसमें मुख्य रूप से 90% प्लांट-बेस्ड फूड (दालें, अनाज, फल, सब्जियां) शामिल होते हैं। इसमें मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे एनिमल प्रोडक्ट्स की मात्रा बहुत सीमित रखी जाती है। ‘ओस्लो (नॉर्वे) में 16 देशों के 37 वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई EAT-Lancet डाइट एक गेम-चेंजर साबित हो रही है।

किडनी के लिए क्यों है वरदान?

सीनियर क्लीनिकल डाइटिशियन डॉ. अनु अग्रवाल के अनुसार, यह डाइट किडनी पर दबाव कम करती है:

  • कम दबाव: प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, एनिमल प्रोटीन के मुकाबले किडनी पर कम बोझ डालते हैं।
  • टॉक्सिन में कमी: हाई फाइबर के कारण शरीर में ऐसे टॉक्सिन कम बनते हैं जो किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • पथरी से बचाव: यह यूरिन में साइट्रेट की मात्रा बढ़ाकर किडनी स्टोन के जोखिम को कम करती है।

किडनी के लिए यह क्यों जरूरी है? (विस्तार से):

  1. प्रोटीन का प्रबंधन: एनिमल प्रोटीन (जैसे रेड मीट) किडनी पर मेटाबॉलिक लोड बढ़ाते हैं। इसके विपरीत, दालों और नट्स से मिलने वाला प्लांट प्रोटीन किडनी के फिल्ट्रेशन प्रोसेस को आसान बनाता है।
  2. गट-किडनी एक्सिस: इस डाइट में मौजूद हाई फाइबर आंतों के माइक्रोब्स को संतुलित करते हैं। जब पेट साफ रहता है और आंतें स्वस्थ रहती हैं, तो खून में ऐसे टॉक्सिन कम बनते हैं जो किडनी को डैमेज करते हैं。
  3. एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभाव: किडनी की बीमारियों का बड़ा कारण शरीर में होने वाली सूजन (Inflammation) है। इस डाइट के एंटीऑक्सीडेंट्स किडनी के टिश्यूज को सुरक्षा प्रदान करते हैं。

डाइट चार्ट और कैलोरी का गणित: 2500 कैलोरी के औसत सेवन के लिए विशेषज्ञों ने निम्नलिखित मात्रा सुझाई है:

  • साबुत अनाज (चावल, गेहूं, बाजरा): 232 ग्राम प्रतिदिन।
  • प्रोटीन के स्रोत: दालें (75 ग्राम) और नट्स (50 ग्राम)।
  • सब्जियां और फल: कम से कम 500 ग्राम का मिश्रण।
  • हेल्दी फैट्स: अनसैचुरेटेड ऑयल्स (जैसे जैतून या सरसों का तेल) 50 ग्राम。

ये खाने के फायदे

  1. लाल शिमला मिर्च: पोटेशियम में कम और विटामिन सी और ए से भरपूर।
  2. फूलगोभी: फाइबर और विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत।
  3. लाल अंगूर: एंटीऑक्सीडेंट और फ्लेवोनोइड्स से भरपूर।
  4. पानी: किडनी को हाइड्रेट रखता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
  5. प्याज: फाइबर, विटामिन सी और फोलेट प्रदान करता है।

किसे सावधानी बरतनी चाहिए? यह डाइट सबके लिए एक जैसी नहीं है। एनीमिया के मरीजों को आयरन की कमी हो सकती है क्योंकि इसमें रेड मीट कम है। गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों को पोषक तत्वों की अतिरिक्त जरूरत होती है, इसलिए उन्हें बिना डॉक्टरी सलाह के इसे फॉलो नहीं करना चाहिए。

आपके हाथ है किडनी की सेहत

किडनी की सेहत सिर्फ दवाओं पर नहीं, बल्कि आपकी थाली पर निर्भर करती है। EAT-Lancet डाइट केवल एक डाइट चार्ट नहीं, बल्कि एक सस्टेनेबल जीवनशैली है जो आपको लंबे समय तक डायलिसिस जैसी स्थितियों से दूर रख सकती है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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