झारखंड में शहरी निकाय चुनाव औपचारिक रूप से भले ही गैर-दलीय आधार पर कराए जा रहे हों, लेकिन जमीनी सियासत में तस्वीर अलग है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तरह ही दलों ने अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में पार्टी लाइन से हटकर चुनाव मैदान में उतरे नेताओं पर अब अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो गई है।
कांग्रेस के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने भी सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश नेतृत्व ने 19 बागी नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
नोटिस में क्या कहा गया?
भाजपा की ओर से जारी शो-कॉज नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित नेता पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं, जो संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ है। नोटिस की तारीख से सात दिनों के भीतर प्रदेश कार्यालय में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
किन नेताओं पर कार्रवाई?
इस सूची में झरिया के पूर्व विधायक Sanjeev Singh का नाम भी शामिल है। इसके अलावा भृगुनाथ भगत, फुलसुंदरी देवी, अनूप सुल्तानिया, ऋतुरानी सिंह, परिंदा सिंह, राजकुमार श्रीवास्तव, परशुराम ओझा, राकेश सिंह, अलख नाथ पांडेय, मुकेश पांडेय, अनिल यादव, सुनीता साव, हीरा साह, लक्ष्मीनारायण भगत, कामेश्वर पासवान, सबरी पाल, नीना शर्मा और तरुण गुप्ता को भी नोटिस भेजा गया है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी Shivpujan Pathak ने कहा कि पार्टी अनुशासन के आधार पर चलती है और कोई भी नेता, चाहे उसका कद कितना भी बड़ा क्यों न हो, अनुशासनहीनता करेगा तो कार्रवाई तय है।
प्रचार अभियान और तेज होगा
भाजपा का कहना है कि भले ही चुनाव दलीय प्रतीक पर नहीं हो रहे, लेकिन लगभग सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों को समर्थन दिया है। ऐसे में समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना संगठन की जिम्मेदारी बनती है।
प्रदेश नेतृत्व के मुताबिक, सोमवार से वरिष्ठ नेताओं के प्रचार कार्यक्रम और तेज होंगे। पूर्व मंत्री C. P. Singh समेत अन्य बड़े नेता मैदान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
राजनीतिक संकेत क्या?
निकाय चुनाव को अक्सर स्थानीय मुद्दों तक सीमित माना जाता है, लेकिन झारखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह चुनाव शक्ति परीक्षण जैसा बन गया है। बागियों पर सख्ती से यह संदेश देने की कोशिश है कि संगठनात्मक अनुशासन से समझौता नहीं होगा।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नोटिस पाने वाले नेता क्या जवाब देते हैं और पार्टी किस स्तर की कार्रवाई करती है। इससे न सिर्फ निकाय चुनाव बल्कि आगे के राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।