Ranchi : राजधानी में मेयर पद का चुनाव अब और दिलचस्प हो गया है। पहले से ही राज्य सरकार में शामिल दो प्रमुख सहयोगी दल—कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा—अपने-अपने समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतार चुके हैं। अब गठबंधन की तीसरी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी रांची मेयर सीट पर अपने समर्थित उम्मीदवार की घोषणा कर दी है।
युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष रंजन कुमार यादव ने प्रेस वार्ता में सुजाता कच्छप को राजद समर्थित उम्मीदवार घोषित किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव और प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार सिंह यादव के निर्देश पर लिया गया है।
“ईमानदार और मिलनसार जनप्रतिनिधि”: राजद
रंजन यादव ने सुजाता कच्छप को “ईमानदार और जनसम्पर्क में सक्रिय” प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि कच्छप वार्ड नंबर 7 से तीन बार पार्षद रह चुकी हैं और जनता के सुख-दुख में साथ देने की वजह से उन्हें व्यापक समर्थन मिला है।
राजद के अनुसार, इस बार सुजाता कच्छप केवल पार्षद पद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मेयर पद की भी दावेदार हैं। पार्टी ने घोषणा की कि सभी नेता और कार्यकर्ता उनके समर्थन में चुनाव अभियान चलाएंगे।
कई नगर निकायों में राजद की सक्रियता
रांची के अलावा राजद ने राज्य के अन्य नगर निकायों में भी समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी की है। इनमें साहिबगंज (राजमहल), दुमका नगर परिषद, बासुकीनाथ नगर पंचायत, मिहिजाम नगर परिषद, जामताड़ा नगर पंचायत, देवघर नगर निगम, चतरा नगर परिषद, गिरिडीह नगर निगम, धनबाद नगर निगम, लातेहार नगर पंचायत, विश्रामपुर नगर पंचायत, हरिहरगंज, हुसैनाबाद, छतरपुर, गढ़वा नगर परिषद और मंझिआंव नगर पंचायत शामिल हैं।
रंजन यादव ने दावा किया कि रांची में भी 25 वार्डों में राजद समर्थित उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
“स्वतंत्र उम्मीदवार, लेकिन भविष्य राजद के साथ”
समर्थन की घोषणा के बाद सुजाता कच्छप ने कहा कि वह इस चुनाव को स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लड़ रही हैं, लेकिन उनका राजनीतिक भविष्य राजद के साथ है। उन्होंने राजद नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि पार्टी का समर्थन उनके लिए सम्मान की बात है।
सत्तारूढ़ गठबंधन में बढ़ी चुनौती
रांची मेयर चुनाव में कांग्रेस, झामुमो और अब राजद के अलग-अलग समर्थित उम्मीदवारों के उतरने से सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। औपचारिक रूप से निकाय चुनाव गैर-दलीय आधार पर हो रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की सक्रियता से मुकाबला राजनीतिक रंग ले चुका है।
विश्लेषकों का मानना है कि बहुकोणीय मुकाबले से वोटों का बंटवारा होगा और इसका सीधा असर अंतिम परिणाम पर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि मतदाता स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं या दलगत समीकरण हावी रहते हैं।