सुप्रीम कोर्ट का जन सुराज को झटका: बिहार विधानसभा चुनाव रद्द करने की मांग खारिज

Anand Kumar
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पीठ ने स्पष्ट किया कि पूरे राज्य के चुनाव को एक साथ चुनौती नहीं दी जा सकती। इसके बजाय, यदि कोई भ्रष्टाचार या गलत चुनावी प्रथा का मामला है, तो प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए अलग-अलग चुनाव याचिकाएं दायर की जानी चाहिए।

जन सुराज पार्टी ने याचिका में मुख्य रूप से आरोप लगाया था कि चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं के खाते में 10,000 रुपये का सीधा हस्तांतरण किया गया, जो मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन था। पार्टी का दावा था कि कर्ज में डूबे राज्य में बिना बजट बैकअप के ऐसे ‘मुफ्त उपहार’ (फ्रीबीज) ने चुनावी माहौल को पक्षपाती बना दिया और निष्पक्षता को प्रभावित किया।

लेकिन कोर्ट ने इस पर कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से सवाल किया- “आपकी पार्टी को कितने वोट मिले? अगर जनता आपको नकार देती है, तो क्या आप लोकप्रियता हासिल करने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं?”

पीठ ने आगे कहा कि याचिका में कैश ट्रांसफर स्कीम को सीधे चुनौती देने वाली कोई स्पष्ट प्रार्थना नहीं थी। यह एक ‘कम्पोजिट इलेक्शन पिटीशन’ है, जो पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग करती है, जो कानूनी रूप से उचित नहीं है। कोर्ट ने नोट किया कि फ्रीबीज का मुद्दा गंभीर है और इसे अलग से जांचा जाएगा, लेकिन हारने वाली पार्टी के जरिए नहीं।

जन सुराज ने 2025 के चुनाव में 243 में से 242 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई। एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) ने 202 सीटें जीतकर फिर से सरकार बनाई, जबकि विपक्षी गठबंधन को महज 35 सीटें मिलीं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली, ताकि वे पटना हाई कोर्ट में नई याचिका दायर कर सकें। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि यह मुद्दा राज्य-विशेष है, इसलिए पटना हाई कोर्ट अधिक उपयुक्त मंच है।

यह फैसला चुनावी फ्रीबीज और मॉडल कोड के उल्लंघन के मुद्दे पर बहस को और तेज कर सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि हार के बाद पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग ‘पब्लिसिटी स्टंट’ जैसी नहीं चल सकती। अब सबकी नजरें पटना हाई कोर्ट पर टिकी हैं, क्या जन सुराज वहां नई राह तलाश पाएगी?

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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