Bhopal : मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के चुनाव में मंगलवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र जांच प्रक्रिया के दौरान निरस्त कर दिया गया। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद राज्यसभा की तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
भाजपा की ओर से नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया गया था कि उम्मीदवार ने अपने शपथपत्र में एक ऐसे मामले का उल्लेख नहीं किया, जो हैदराबाद की एक अदालत में लंबित बताया जा रहा है। इसी आधार पर निर्वाचन अधिकारियों ने पहले स्पष्टीकरण मांगा था और निर्धारित समय के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया था। जवाब पर विचार करने के बाद नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया गया।
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दूसरी ओर कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई करार दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ किसी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनके अनुसार अदालत से केवल एक नोटिस प्राप्त हुआ था, जिसे आपराधिक प्रकरण मानना उचित नहीं है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस फैसले को न्यायालय में चुनौती देगी।
इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस सक्रिय हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से संपर्क कर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है।
नामांकन निरस्त होने की खबर ऐसे समय आई जब कांग्रेस अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजने की तैयारी कर रही थी। पार्टी ने संभावित राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए विधायकों की बाड़ाबंदी का निर्णय लिया था। इसके लिए एक चार्टर्ड विमान की व्यवस्था भी की गई थी। हालांकि जैसे ही नामांकन रद्द होने की सूचना मिली, विधायकों को लेकर रवाना होने की तैयारी कर रहा विमान वापस लौट आया और पूरी रणनीति पर विराम लग गया।
इससे पहले भी विमान को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। दोपहर में भोपाल पहुंची चार्टर्ड फ्लाइट को प्रारंभिक स्तर पर उड़ान की अनुमति नहीं मिली थी। एयरपोर्ट अधिकारियों ने तकनीकी और अनुमति संबंधी कारणों का हवाला दिया था। कांग्रेस नेताओं ने इसे सरकार के दबाव का परिणाम बताते हुए विरोध दर्ज कराया था।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के प्रभाव में विमान की उड़ान को अनावश्यक रूप से रोका गया। उनका कहना था कि जिस विमान को दिल्ली से भोपाल आने की अनुमति मिल सकती है, उसे बेंगलुरु जाने से रोकना तर्कसंगत नहीं है। हालांकि लगभग दो घंटे तक चले गतिरोध के बाद विमान को उड़ान की मंजूरी मिल गई और शाम के समय यह रवाना हुआ, लेकिन बाद की राजनीतिक परिस्थितियों ने पूरी योजना को प्रभावित कर दिया।
इस बीच विधानसभा परिसर में भी माहौल तनावपूर्ण बना रहा। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे की स्थिति देखी गई। कांग्रेस विधायकों ने रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिस और विधानसभा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। घटनाक्रम के कारण विधानसभा परिसर कुछ समय तक राजनीतिक टकराव का केंद्र बना रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नामांकन निरस्तीकरण का फैसला बरकरार रहता है तो मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। वहीं कांग्रेस द्वारा अदालत और निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने के संकेतों से यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।
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