JBVNL : टैलेंट हो, तो वर्माजी जैसा! लगातार पांंचवें साल के लिए भी मिला एक्सटेंशन

Anand Kumar
23 Min Read

घाटा, टैरिफ वृद्धि और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच JBVNL MD केके वर्मा का कार्यकाल फिर बढ़ा

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Ranchi : झारखंड सरकार ने एक बार फिर केके वर्मा का कार्यकाल झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के प्रबंध निदेशक (एमडी) के पद पर एक साल के लिए बढ़ा दिया है। वर्मा चार साल पहले सेवा से रिटायर हुए थे और तब से लगातार सेवा विस्तार पर चल रहे हैं। कार्मिक विभाग की अधिसूचना के अनुसार, उनकी सेवा अवधि अब 31 दिसंबर 2026 तक रहेगी। मूल रूप से सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें चार साल की कॉन्ट्रैक्ट नियुक्ति दी गई थी, जो आज समाप्त हो रही थी। यह पांचवां विस्तार है, जो राज्य की बिजली व्यवस्था में चल रही गंभीर समस्याओं के बीच कई सवाल खड़े कर रहा है। JBVNL लंबे समय से भारी वित्तीय घाटे, बिजली चोरी, अनियमित आपूर्ति और बार-बार टैरिफ वृद्धि के प्रस्तावों से जूझ रहा है।वर्मा के कार्यकाल की प्रमुख घटनाएं और विवाद

भ्रष्टाचार के आरोप और राजनीतिक हमला: 2023 में भाजूपा युवा मोर्चा (BJYM) ने वर्मा पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन की योजना बनाई थी। आरोप था कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और कमीशन के लिए जूनियर अधिकारियों के जरिए काम करवाया गया। BJYM ने मांग की थी कि उनका कार्यकाल न बढ़ाया जाए और जांच हो।

  • टैरिफ वृद्धि के प्रस्ताव और जन असंतोष : वर्मा के नेतृत्व में JBVNL ने कई बार बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया। 2024 में 40% तक वृद्धि की मांग की गई, जिसे आंशिक रूप से मंजूरी मिली, लेकिन उपभोक्ताओं और व्यापारियों ने इसका कड़ा विरोध किया। स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिलों में अचानक इजाफे की शिकायतें बढ़ीं, साथ ही सर्वर डाउनटाइम और ऑटोमैटिक डिस्कनेक्शन से लोगों को परेशानी हुई।
  • बिजली संकट और तकनीकी समस्याएं : कोयला उत्पादक राज्य होने के बावजूद झारखंड में बिजली कटौती आम रही। पुरानी लाइनें, ओवरलोडिंग और मौसम की मार को वजह बताया जाता रहा। 2022-2023 में गर्मी के दौरान लंबे पावर कट ने जनजीवन प्रभावित किया। JBVNL का AT&C लॉस (तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान) अभी भी ऊंचा है, हालांकि स्मार्ट मीटर और AB केबल से कुछ सुधार हुआ है।
  • वित्तीय हालत : निगम सालाना हजारों करोड़ का घाटा झेल रहा है। बकाया भुगतान, बिजली खरीद की ऊंची लागत और चोरी के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है।

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विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि बार-बार कार्यकाल विस्तार से निगम में स्थायी सुधार नहीं आ रहे। एक सेवानिवृत्त अधिकारी को लंबे समय तक महत्वपूर्ण पद पर रखना पारदर्शिता और नई ऊर्जा की कमी को दर्शाता है। जहां एक तरफ स्मार्ट मीटर और चोरी रोकने के कदम सराहनीय हैं, वहीं टैरिफ बढ़ोतरी और सेवा की गुणवत्ता पर सवाल बरकरार हैं।राज्य सरकार का तर्क है कि वर्मा का अनुभव निगम को स्थिरता दे रहा है, लेकिन जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह विस्तार वास्तव में बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाएगा या सिर्फ现状 को बनाए रखेगा?बिजली उपभोक्ताओं की नजर अब झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग (JSERC) पर है, जो आने वाले टैरिफ प्रस्तावों पर फैसला लेगा।
नए साल में बिजली बिलों का बोझ और बढ़ने की आशंका से आम आदमी चिंतित है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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