रांची। निषिद्ध मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से पिछले 15 दिनों से चलाए जा रहे राज्यव्यापी जागरूकता अभियान का गुरुवार को डोरंडा स्थित शौर्य सभागार में आयोजित भव्य समारोह के साथ समापन हो गया। कार्यक्रम में नशामुक्ति अभियान से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवी संस्थाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार नशामुक्ति जागरूकता पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि नशा केवल किसी व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, समाज और पूरे राज्य को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य नशामुक्त और स्वस्थ झारखंड का निर्माण करना है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों के समन्वय से राज्यभर में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया।
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उन्होंने कहा कि यह अभियान पिछले तीन वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है और सरकार का प्रयास है कि भविष्य में इसे वर्षभर संचालित किया जाए। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो भी बनोगे नवाब, लेकिन नशा करोगे तो हो जाओगे खराब।” उन्होंने कहा कि युवाओं को शिक्षा, खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना समय की आवश्यकता है ताकि वे नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रह सकें।
इरफान अंसारी ने कहा कि बड़ी संख्या में युवा नशे की लत के कारण रिनपास और सीआईपी जैसे संस्थानों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि देर रात सड़कों और फ्लाईओवर के नीचे सिरप और सॉल्यूशन जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने पुलिस-प्रशासन से ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रखने और समाज से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
रांची की मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएगा, तब तक इस अभियान का उद्देश्य पूरी तरह सफल नहीं हो सकेगा। उन्होंने सुरक्षित रांची और सुरक्षित झारखंड के निर्माण के लिए जनसहभागिता को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार ने कहा कि वर्ष 2024 में शुरू हुआ यह अभियान लगातार तीसरे वर्ष आयोजित किया गया है। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने, जोखिमग्रस्त विद्यार्थियों की पहचान करने तथा नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के लिए काउंसलिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर बल दिया। उन्होंने लोगों से ड्रग्स से जुड़े मामलों की जानकारी मिलने पर टोल-फ्री और हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करने की अपील भी की।
गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास से यह अभियान सफल रहा। उन्होंने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की प्रचार-प्रसार में निभाई गई भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि नशे के दुष्प्रभावों पर खुलकर चर्चा करना और समाज को जागरूक करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केंद्र में रखकर वर्षभर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल पुरवार ने कहा कि नए विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत किसी भी शिक्षण संस्थान के 100 मीटर के दायरे में नशे से जुड़ी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम, मॉड्यूल आधारित नशामुक्ति पाठ्यक्रम तथा विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए प्रभावी काउंसलिंग व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।
समारोह के दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार नशामुक्ति जागरूकता पुस्तिका का विमोचन किया गया। इसके बाद अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारियों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवी संस्थाओं को सम्मानित किया गया। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक आनंद, डीपीआरओ उर्वशी पांडे, सहायक निदेशक अभय कुमार, डीपीआरओ अंजना भारती, डीपीआरओ असीम कुमार, एनएचएम से डॉ. लाल मांझी, उच्च शिक्षा विभाग से नवनीता, आलोक रंजन, निर्मला सिन्हा, डॉ. सजल आशीष नाग, पर्यटन विभाग से आशीष कुमार बनर्जी, मुकेश कुमार, स्वास्थ्य विभाग से सुशांत कुमार सहित अनेक अधिकारियों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में झारखंड में पहली बार फाइनेंशियल सीजर (Financial Seizure) की कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले सनोज कुमार चौधरी को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इसके अलावा कई चिकित्सकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी नशामुक्ति अभियान में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशासनिक पदाधिकारियों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और युवाओं की उपस्थिति रही।
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