रांची: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर छात्रों के हित में जो भी संवैधानिक और नियमसंगत होगा, वही निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं सीना चीरकर नहीं दिखा सकता कि हम कितने गंभीर हैं। सरकार की आंख, कान और संवेदनशीलता सब कुछ है। छात्रों के हित में जो भी होगा, उसका निर्णय राज्य सरकार करेगी। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और अनुसंधान का इंतजार है। बहुत जल्द राज्य के लोगों को इस विषय पर जानकारी दी जाएगी।”
मुख्यमंत्री के इस बयान को छात्र आंदोलन शुरू होने के बाद सरकार की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
विधानसभा सत्र और बड़े आयोजनों से पहले सरकार पर बढ़ा दबाव
मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय आया है, जब राज्य में छात्र आंदोलन लगातार दसवें दिन भी जारी है। 6 अगस्त से झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इसके अलावा 9 और 10 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्य सरकार का बड़ा कार्यक्रम प्रस्तावित है।

इसी बीच JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान किया है, जबकि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने 7 अगस्त को विधानसभा मार्च की घोषणा की है। ऐसे में सरकार पर आंदोलन के समाधान का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
जयपाल सिंह स्टेडियम बना आंदोलन का केंद्र
रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पिछले दस दिनों से आंदोलनरत अभ्यर्थियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अभ्यर्थी JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, विवादित परीक्षाओं पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने धरना, सत्याग्रह और मशाल जुलूस जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं। अब तक आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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हाई पावर कमेटी की चर्चा, लेकिन आदेश नहीं
इस बीच यह चर्चा भी तेज हुई कि सरकार छात्रों से वार्ता के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित कर सकती है। हालांकि अब तक इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इसलिए कमेटी के गठन और उसके स्वरूप को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
छात्र आंदोलन को अब विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों का समर्थन मिलने लगा है। धनबाद में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) ने प्रदर्शन कर रांची में आंदोलनरत छात्रों के प्रति समर्थन जताया। डुमरी विधायक जयराम महतो ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
वहीं, अभ्यर्थी न्याय मंच के नेता देवेंद्र महतो लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हैं। दूसरी ओर, विभिन्न सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक भी आंदोलनरत छात्रों के लिए भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें
आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- JPSC और JSSC की कथित अनियमित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच।
- 14वीं JPSC एवं JSSC CGL परीक्षा की स्वतंत्र एजेंसी से जांच।
- TDPL द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं की जांच।
- JPSC और JSSC में अध्यक्ष एवं सदस्यों की पारदर्शी नियुक्ति।
- लंबित परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर जारी करना।
- अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देना।
- दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद अब पूरे राज्य की नजर इस बात पर है कि सरकार आने वाले दिनों में छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर क्या ठोस निर्णय लेती है।
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