नयी दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की याचिका पर सुनवाई के दौरान उनकी उम्र को लेकर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि 27 और 31 वर्ष की उम्र वाले याचिकाकर्ता Gen Z नहीं हैं। साथ ही, कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मामले की सुनवाई उसी दिन स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में होनी है, तो उन्होंने सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने दोनों नेताओं को पहले SEM कोर्ट की कार्यवाही का इंतजार करने और उसके बाद उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी। इस बीच, पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका दिल्ली हाईकोर्ट से वापस ले ली।
‘पहले SEM कोर्ट की सुनवाई का इंतजार करें’
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि जब संबंधित मामले पर उसी दिन दोपहर दो बजे SEM कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है, तो याचिकाकर्ता पहले वहां की कार्यवाही का इंतजार क्यों नहीं कर सकते।
अदालत ने समझाया कि यदि SEM कोर्ट का फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आता है, तो विवाद वहीं समाप्त हो सकता है। यदि फैसला उनके पक्ष में नहीं आता, तो वे पहले पुनरीक्षण अदालत और उसके बाद उचित स्थिति में हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
हालांकि, CJP की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट में ही तत्काल सुनवाई और राहत देने का अनुरोध किया।
न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को दी थी चुनौती
CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसके तहत उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाई गई थी। वे इस आदेश के खिलाफ तत्काल राहत चाहते थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने निचली अदालत की प्रक्रिया पूरी होने से पहले सीधे हाईकोर्ट आने पर सवाल उठाया और उपलब्ध न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी।
पीस बॉन्ड को लेकर भी अदालत की नसीहत
रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान पीस बॉन्ड के उल्लंघन का मुद्दा भी उठा। अदालत ने इस संबंध में दोनों नेताओं को नसीहत दी। हालांकि, मामले के सभी तथ्यों और संबंधित आदेशों के आधार पर ही पीस बॉन्ड के उल्लंघन की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हाईकोर्ट से याचिका वापस
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रंका ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका दिल्ली हाईकोर्ट से वापस ले ली है।
इस घटनाक्रम के साथ हाईकोर्ट में तत्काल राहत पाने की उनकी कोशिश फिलहाल याचिका वापस लेने के साथ समाप्त हुई। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और SEM कोर्ट की कार्यवाही का परिणाम महत्वपूर्ण होगा
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