नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध के बीच दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा हुआ। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेहा बोरा के बोलना शुरू करते ही कुछ लोगों ने ‘बंद करो’ के नारे लगाए। इसके बाद अभिजीत दीपके ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराने की कोशिश की।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और अभिनेता प्रकाश राज समेत कई लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने, विरोध-प्रदर्शनों पर पाबंदियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
‘हिरासत और मारपीट से आंदोलन नहीं रुकेगा’: नेहा बोरा
नेहा बोरा ने कहा कि लोगों को हिरासत में लेने और उनके साथ मारपीट करने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि यह लड़ाई देश के आम और गरीब परिवारों के बीच भी जारी है। उनके मुताबिक, दिल्ली के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में भी लोग विभिन्न मंचों से अपनी आवाज उठा रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलनकारियों की पहचान और उनके विरोध को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी गई। AICP की अध्यक्ष ईशा ने कहा कि आंदोलन में देश के युवा, जेन-जी और छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
अभिजीत दीपके ने सरकार से पूछे सवाल
अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और विरोध-प्रदर्शन के लिए स्थानों पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मामले में सरकार इतनी सक्रिय क्यों है।
दीपके ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच वोटों के अंतर तथा मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे का जिक्र किया। हालांकि, मतदाता सूची से हटाए गए वोटों और चुनावी नतीजों के बीच संबंध के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
‘देश गांधी के विचारों और अंबेडकर के संविधान से चलेगा’
दीपके ने कहा कि देश गांधी के विचारों और डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान के आधार पर चलना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार की राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाते हुए ‘वन नेशन, वन पार्टी’ और ‘वन नेशन, वन लीडर’ की आशंका जताई।
उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रंका की हिरासत का जिक्र करते हुए कहा कि तिरंगा लहराना अपराध नहीं हो सकता। उनके बयान का मुख्य जोर विरोध करने के अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता पर रहा।
तिरंगा मार्च को लेकर बढ़ा विवाद
CJP और अन्य संगठनों ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा लहराकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है।
इससे पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और कुछ कार्यकर्ताओं की हिरासत को लेकर भी विवाद सामने आया था। इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हिरासत और प्रतिबंधों से उनकी आवाज नहीं दबाई जा सकती। वहीं, प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और अदालत की ओर से क्या अंतिम निर्णय लिया जाता है, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
यह भी पढ़ें – राहुल गांधी का मार्च पुलिस ने रोका, सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका; SIR पर रोक की मांग