बीएसएल प्रबंधन से 10 हजार विस्थापितों को नियोजन देने की मांग; वित्त मंत्री बोले—प्लांट के लिए दी गई 32 हजार एकड़ जमीन, अब अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं। दुर्गापूजा के बाद विधायक-सांसद भी धरने पर बैठेंगे।
बोकारो: बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में विस्थापितों के नियोजन की मांग को लेकर जारी आंदोलन ने शनिवार को नया मोड़ ले लिया। विस्थापितों के प्रतिनिधियों, झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, बोकारो के उपायुक्त (डीसी), पुलिस अधीक्षक (एसपी) और बीएसएल के निदेशक प्रभारी समेत अधिकारियों के बीच करीब दो घंटे तक चली त्रिपक्षीय वार्ता बेनतीजा रही। वार्ता विफल होने के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष खुद धरने पर बैठ गए और विस्थापितों की मांगों का समर्थन किया।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि विस्थापित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने बीएसएल प्रबंधन से नियोजन के मुद्दे पर ठोस पहल करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो दुर्गापूजा के बाद विधायक और सांसद भी विस्थापितों के समर्थन में धरने पर बैठेंगे।
32 हजार एकड़ जमीन दी, तो 10 हजार विस्थापितों को नियोजन क्यों नहीं?
धरने पर बैठे वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना के लिए विस्थापित परिवारों ने करीब 32 हजार एकड़ जमीन दी है। उनके अनुसार, अब तक लगभग 18 हजार लोगों को नियोजन मिल चुका है, जबकि करीब 10 हजार विस्थापितों को नियोजन देने की मांग उठ रही है।
मंत्री ने कहा कि जमीन देने वाले परिवारों की मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विस्थापितों को गुमराह करने के बजाय प्रबंधन को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विस्थापन और नियोजन का सवाल केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रभावित परिवारों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य से भी जुड़ा है।
केंद्र का उपक्रम, लेकिन जमीन पर राज्य सरकार का अधिकार
वित्त मंत्री ने बीएसएल प्रबंधन को याद दिलाया कि बोकारो स्टील प्लांट केंद्र सरकार का उपक्रम है, लेकिन जमीन पर राज्य सरकार का अधिकार है। ऐसे में विस्थापितों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
उन्होंने प्रबंधन से मांग की कि विस्थापितों के नियोजन से जुड़े मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाया जाए और समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
दुर्गापूजा के बाद विधायक-सांसद भी करेंगे आंदोलन
करीब दो घंटे की वार्ता के बावजूद सहमति नहीं बनने पर मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने विस्थापितों के समर्थन में लगभग दो घंटे तक सांकेतिक धरना दिया। उनके धरने पर बैठने से आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने के संकेत मिले हैं।
मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि विस्थापितों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो दुर्गापूजा के बाद राज्य के विधायक और सांसद भी धरने पर बैठेंगे। इससे बीएसएल में नियोजन का मुद्दा आने वाले दिनों में और राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।
आठवें दिन भी आंदोलन जारी, प्लांट का कामकाज प्रभावित
बीएसएल में नियोजन की मांग को लेकर विस्थापितों का आंदोलन शनिवार को आठवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों द्वारा प्लांट के प्रवेश द्वार बंद किए जाने से आवागमन और कामकाज प्रभावित हुआ है।
वार्ता विफल होने और मंत्री के धरने पर बैठने के बाद अब सबकी नजर बीएसएल प्रबंधन के अगले कदम पर है। यदि जल्द कोई सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन के और तेज होने की आशंका है।
मुख्य सवाल: क्या बीएसएल प्रबंधन विस्थापितों की नियोजन संबंधी मांगों पर कोई ठोस फैसला लेगा, या दुर्गापूजा के बाद यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा?
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