अपनी ही सरकार पर अंबा प्रसाद का तीखा हमला, डीजीपी और पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल

Anand Kumar
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कहा – डीजीपी का नाम “तदाशा” नहीं बल्कि “हताशा मिश्रा” होना चाहिए

Ranchi : झारखंड की सियासत में उस समय हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने अपनी ही सरकार की कानून-व्यवस्था पर खुलकर सवाल खड़े कर दिए। प्रेस से बातचीत में उन्होंने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली, बढ़ते अपराध और डीजीपी के कार्यकाल विस्तार को लेकर तीखी टिप्पणी की।

अंबा प्रसाद ने डीजीपी अनुराग गुप्ता के पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी शीर्ष पद पर बने रहना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने टिप्पणी की कि “ऐसा लगता है जैसे पुलिस मुखिया का पद भाड़े पर चल रहा है।”

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि डीजीपी का नाम “तदाशा” नहीं बल्कि “हताशा मिश्रा” होना चाहिए, क्योंकि जनता पुलिस व्यवस्था से निराश हो चुकी है।


कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

अंबा प्रसाद ने राज्य में बढ़ते अपराधों को लेकर चिंता जताई और कहा कि आम लोग, खासकर व्यवसायी वर्ग, असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं।

उन्होंने डायल 112 सेवा पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, पहले 100 नंबर पर कॉल करने पर प्रतिक्रिया नहीं मिलती थी और अब 112 व्यवस्था में भी स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा है।


हालिया घटनाओं का दिया हवाला

अंबा प्रसाद ने हाल के कुछ मामलों का जिक्र करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

  • बड़कागांव क्षेत्र से एक बच्ची के लापता होने के मामले में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं
  • हजारीबाग में किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए

उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति संतोषजनक नहीं है।


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“पुलिस पर भाजपा का प्रभाव बढ़ा”

अंबा प्रसाद ने एक कदम आगे बढ़ते हुए राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक प्रभाव का आरोप भी लगाया।

उन्होंने कहा कि पुलिस का नियंत्रण राज्य सरकार के पास होना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा प्रतीत होता है कि उस पर बाहरी प्रभाव है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा,
“पुलिस का रिमोट राज्य सरकार के पास है, लेकिन उसकी बैटरी दिल्ली में है।”


पारिवारिक राजनीतिक संदर्भ भी चर्चा में

गौरतलब है कि हाल ही में अंबा प्रसाद के पिता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को कांग्रेस पार्टी ने तीन साल के लिए निष्कासित किया है। उन पर पार्टी और सरकार के खिलाफ बयानबाजी का आरोप लगाया गया था।

इस पृष्ठभूमि में अंबा प्रसाद का अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


सियासी मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक राजनीतिक संकेत भी हैं।

सत्ताधारी गठबंधन के भीतर से उठ रही इस तरह की आवाजें आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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