झारखंड में माओवादी अलर्ट: 8 से 30 नवंबर तक तीन सप्ताह पुलिस हाई अलर्ट पर

Anand Kumar
6 Min Read
प्रतीकात्मक तस्वीर: भारतीय अर्धसैनिक जवान। फोटो: Abhiak47 / Wikimedia Commons, सार्वजनिक डोमेन.

रांची: झारखंड में प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन की ओर से नवंबर महीने में लगातार तीन सप्ताह तक अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाने की सूचना के बाद पुलिस मुख्यालय ने राज्यभर में सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है। पहला कार्यक्रम ‘खूनी क्रांति सप्ताह’ रविवार, 8 नवंबर से शुरू हो रहा है। पुलिस ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और संबंधित सुरक्षा इकाइयों को संवेदनशील स्थानों की निगरानी मजबूत करने तथा किसी भी संभावित घटना से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को कहा है।

पुलिस मुख्यालय का यह अलर्ट 5 नवंबर 2026 को जारी एक गोपनीय संचार के आधार पर सामने आया है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, ओडिशा बाइट्स, हिन्दुस्तान और अन्य समाचार माध्यमों ने इस पत्र की सामग्री का हवाला देते हुए बताया है कि निर्देश पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) की ओर से जिलों के पुलिस प्रमुखों को भेजे गए। इसमें रांची, जमशेदपुर और धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षकों के साथ झारखंड जगुआर और रेल पुलिस को भी सतर्क रहने को कहा गया है।

नवंबर में तीन चरणों में कार्यक्रम की सूचना

विशेष शाखा के पुलिस अधीक्षक की ओर से 4 नवंबर को भेजे गए पत्र में माओवादी संगठन के तीन कार्यक्रमों की सूचना का उल्लेख बताया गया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार, नवंबर में सतर्कता की अवधि इस प्रकार है:

  • 8 से 15 नवंबर: खूनी क्रांति सप्ताह
  • 16 से 22 नवंबर: दमन विरोधी सप्ताह
  • 24 से 30 नवंबर: शहीद सप्ताह

इन कार्यक्रमों के दौरान संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने या किसी अप्रिय घटना को अंजाम देने की कोशिश कर सकता है—ऐसी आशंका को ध्यान में रखते हुए पुलिस को एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अलर्ट जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी हमले की पुष्टि हो गई है। यह संभावित जोखिम को देखते हुए जारी की गई सुरक्षा संबंधी चेतावनी है।

रेलवे, सुरक्षा कैंप और सरकारी प्रतिष्ठान निगरानी के दायरे में

रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा बलों के कैंप, पुलिस थानों, पिकेट, शस्त्रागार और रेलवे से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा है। रेलवे स्टेशन, रेल लाइन, ट्रेन, पुल-पुलिया और रेल परिसरों के साथ-साथ सड़क परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों पर भी निगरानी बढ़ाने का निर्देश है।

सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में प्रखंड तथा अंचल कार्यालय, बैंक, वित्तीय संस्थान, वन विभाग के कार्यालय और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठान शामिल हैं। दूर-दराज के इलाकों में संचार व्यवस्था से जुड़े मोबाइल टावर, खनन क्षेत्र, कोल साइडिंग, कोल डंप, प्रमुख सड़कें और स्थानीय बाजार भी विशेष सतर्कता के दायरे में रखे गए हैं।

सूचना की पुष्टि के बाद ही कार्रवाई करने की हिदायत

पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा बलों की आवाजाही को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा है। पत्र के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, माओवादी छोटी घटनाओं या अफवाहों के जरिए जवानों को किसी स्थान पर बुलाने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए किसी घटना की सूचना मिलने पर बिना सत्यापन के बल को मौके पर भेजने से बचने और पहले सूचना की विश्वसनीयता जांचने की हिदायत दी गई है।

अधिकारियों को तीनों कार्यक्रमों की अवधि में सुरक्षा संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन कराने, जवानों की नियमित ब्रीफिंग करने और नक्सल प्रभावित इलाकों में खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान मजबूत रखने को कहा गया है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने तथा किसी भी चेतावनी को गंभीरता से लेने का निर्देश भी दिया गया है।

आत्मसमर्पण और गिरफ्तारियों के बावजूद सतर्कता

पुलिस मुख्यालय के पत्र का हवाला देते हुए प्रकाशित खबरों में कहा गया है कि आत्मसमर्पण, पुनर्वास कार्यक्रमों और गिरफ्तारियों के कारण माओवादी संगठन पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। इसके बावजूद पुलिस ने संभावित गतिविधियों को हल्के में नहीं लेने का फैसला किया है। राज्य के सभी जिलों और विशेष सुरक्षा इकाइयों को अपने-अपने क्षेत्र की संवेदनशीलता के अनुसार तैयारी रखने को कहा गया है।

8 नवंबर से शुरू हो रहे पहले सप्ताह के साथ झारखंड में नवंबर के बाकी दिनों तक पुलिस की सतर्कता बनी रहेगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में किसी नई घटना की पुष्टि नहीं है; मुख्यालय का निर्देश संभावित खतरे को रोकने और सार्वजनिक व सरकारी ढांचे की सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से है।

स्रोत: झारखंड पुलिस मुख्यालय के 5 नवंबर 2026 के निर्देश का विवरण—द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, ओडिशा बाइट्स, हिन्दुस्तान, जागरण, लगातर और SATP की रिपोर्टों से तथ्यों का मिलान। मूल गोपनीय पत्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है; इसलिए निर्देशों का विवरण प्रकाशित रिपोर्टों के हवाले से दिया गया है।

फीचर इमेज क्रेडिट: भारतीय अर्धसैनिक जवान की प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो: Abhiak47, Wikimedia Commons; लेखक ने इसे सार्वजनिक डोमेन में जारी किया है। मूल तस्वीर और अधिकार विवरण।

Share This Article
Follow:
वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *