निशा भगत की मौत पर गरमाई सियासत, गुमला में अंतिम संस्कार, मरांडी बोले – CBI जांच हो

Anand Kumar
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रांची/गुमला: आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है। गुमला में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां शामिल हुईं। इस बीच परिजनों की ओर से मामले में साजिश और हत्या की आशंका जताते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग तेज हो गई है।

निशा भगत की मौत को लेकर परिवार की ओर से उठाए गए सवालों के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ लिया है। परिजन पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और गहन जांच चाहते हैं। उनका आरोप है कि मौत के पीछे किसी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

निशा भगत की मौत

अंतिम संस्कार में रघुवर दास समेत कई नेता पहुंचे

गुमला में आयोजित अंतिम संस्कार में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, मधु कोड़ा, गीता कोड़ा और समीर उरांव सहित कई नेताओं की मौजूदगी की जानकारी सामने आई। नेताओं ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।

निशा भगत को न्याय दिलाने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर टावर चौक पर प्रदर्शन
निशा भगत की मौत के मामले में सीबीआई जांच और न्याय की मांग पर शनिवार को टावर चौक में धरना-प्रदर्शन किया गया।

परिजनों ने उठाए सवाल, CBI जांच की मांग

निशा भगत की मौत को लेकर परिजनों ने गंभीर आशंकाएं जताई हैं। परिवार की मांग है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए, ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं और उठ रहे सवालों का निष्पक्ष तरीके से खुलासा हो सके। परिजनों ने इसे सामान्य घटना मानकर छोड़ने के बजाय साजिश की आशंका की भी जांच कराने की मांग की है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

निशा भगत की मौत के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाओं और परिवार की CBI जांच की मांग से झारखंड में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की ओर से भी संज्ञान लिए जाने और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगे जाने की बात सामने आई है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और संबंधित एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर है।

फिलहाल, मामले में परिजनों की ओर से लगाए गए आरोप और CBI जांच की मांग सामने आई है। मौत के कारणों तथा किसी संभावित साजिश की पुष्टि आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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