झारखंड के 7 IAS अधिकारियों के इंपैनलमेंट की प्रक्रिया तेज, मंजूनाथ भजंत्री और छवि रंजन समेत इन अधिकारियों के नाम शामिल

Anand Kumar
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केंद्र में संयुक्त सचिव और झारखंड में सचिव स्तर के पदों पर नियुक्ति का खुल सकता है रास्ता, 2011 बैच के अधिकारियों के दस साल के सेवा रिकॉर्ड और सतर्कता स्थिति की हुई जांच

रांची। झारखंड कैडर के 2011 बैच के सात आईएएस अधिकारियों को केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के पदों पर नियुक्ति के लिए इंपैनलमेंट करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इस सूची में रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, खेल निदेशक छवि रंजन और खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा समेत सात अधिकारियों के नाम शामिल हैं।

इस प्रक्रिया के पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारी केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के पदों पर नियुक्ति के लिए पात्र हो सकेंगे। इसके साथ ही झारखंड में सचिव स्तर के पदों पर उनकी पदस्थापना का रास्ता भी खुल सकता है।

इन सात अधिकारियों के नाम हैं शामिल

इंपैनलमेंट की प्रक्रिया में झारखंड कैडर के जिन सात आईएएस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें शामिल हैं—

  1. राहुल कुमार सिन्हा – निदेशक, खान विभाग।
  2. राय महिमापत रे – वर्ल्ड बैंक में पदस्थापित।
  3. छवि रंजन – खेल निदेशक।
  4. अंजनेयुलु दोड्डे – विशेष सचिव, राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग।
  5. मंजूनाथ भजंत्री – उपायुक्त, रांची।
  6. राजेश्वरी बी – निदेशक, पंचायती राज विभाग।
  7. वाघमारे प्रसाद कृष्णा – अपर निदेशक, रिम्स, झारखंड।

केंद्र सरकार ने मांगी थी सतर्कता और संपत्ति की जानकारी

भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस प्रक्रिया के तहत झारखंड सरकार से संबंधित अधिकारियों की अद्यतन सतर्कता स्थिति (Vigilance Status) और अचल संपत्ति विवरण (IPR) की जानकारी मांगी थी।

इस संबंध में केंद्र सरकार ने 7 अक्टूबर 2026 को झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र भेजा था। इसके बाद राज्य के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने 14 अक्टूबर को संबंधित अधिकारियों की सतर्कता प्रोफाइल तैयार कर केंद्र सरकार के पोर्टल पर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

27 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के अनुसार, इंपैनलमेंट का प्रस्ताव केंद्र के कार्मिक विभाग और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी।

पिछले दस वर्षों का रिकॉर्ड भी खंगाला गया

केंद्र सरकार ने अधिकारियों की सतर्कता प्रोफाइल में पिछले दस वर्षों के कार्यकाल का विस्तृत ब्योरा मांगा था। इसमें अधिकारियों के पदस्थापन, मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के रूप में उनकी जिम्मेदारी और सतर्कता से जुड़े मामलों की जानकारी शामिल है।

इसके अलावा पिछले दस वर्षों के दौरान उनके खिलाफ किसी तरह की सतर्कता जांच, दंडात्मक कार्रवाई, लंबित विभागीय या आपराधिक कार्यवाही, प्रस्तावित कार्रवाई और लंबित शिकायतों का विवरण भी मांगा गया था।

अधिकारियों ने अपनी अचल संपत्ति का वार्षिक विवरण (IPR) जमा किया है या नहीं, इसकी जानकारी भी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इंपैनलमेंट का मतलब तत्काल नियुक्ति नहीं

इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इंपैनलमेंट और नियुक्ति दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

इंपैनलमेंट पूरा होने का अर्थ यह है कि संबंधित अधिकारी केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के पदों पर नियुक्ति के लिए पात्र हो सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी सात अधिकारियों को तत्काल केंद्र में संयुक्त सचिव बना दिया जाएगा।

इसी तरह राज्य सरकार में सचिव स्तर की जिम्मेदारी मिलने के लिए भी अलग से पदस्थापना का निर्णय लिया जाएगा।

ऐसे में अब नजर केंद्र सरकार की अंतिम प्रक्रिया और झारखंड सरकार के अगले प्रशासनिक फैसलों पर है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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