रांची। झारखंड में लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े JSSC CGL विवाद में अब सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले पर है। झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई। सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता, कथित वित्तीय लेन-देन और परीक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों का हवाला दिया।
सरकार ने कहा- परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। सरकार का कहना था कि जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पूरी परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
सरकार के मुताबिक, परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं में गंभीर कमियां थीं और जांच के दौरान प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ियों के संकेत मिले। सरकार ने यह भी बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और 28 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
सरकार की सबसे बड़ी दलील यह रही कि मौजूदा परिस्थितियों में यह तय करना बेहद मुश्किल है कि कौन अभ्यर्थी गड़बड़ी में शामिल था और कौन पूरी तरह निर्दोष। ऐसे में केवल कुछ अभ्यर्थियों को अलग करके बाकी परीक्षा को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
अभ्यर्थियों ने कहा- पूरी परीक्षा रद्द करना सही नहीं
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं और सफल अभ्यर्थियों की ओर से पूरी परीक्षा रद्द किए जाने का विरोध किया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि अभी तक ऐसा ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक हुआ था। उनका कहना था कि अगर कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा से पहले संभावित प्रश्नों या उत्तरों की जानकारी हासिल की थी, तो जांच के आधार पर दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग किया जा सकता।
अभ्यर्थियों की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सरकार ने कुछ अभ्यर्थियों को लेकर खुद कार्रवाई की है। ऐसे में यदि संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान संभव है, तो पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने की जरूरत पर सवाल उठता है।
नेपाल में अभ्यर्थियों को ले जाने का भी मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान जांच से जुड़े कुछ गंभीर आरोप भी अदालत के सामने रखे गए। सरकार की ओर से बताया गया कि कुछ अभ्यर्थियों को नेपाल सहित अन्य स्थानों पर ले जाकर कथित तौर पर प्रश्नों के उत्तर याद कराने की बात जांच में सामने आई है।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने इस पूरे मामले को अलग-अलग अभ्यर्थियों की कथित गड़बड़ी तक सीमित रखने और निर्दोष उम्मीदवारों को राहत देने की मांग की।
क्या पूरी परीक्षा रद्द होगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाईकोर्ट JSSC CGL की पूरी परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले को सही मानता है या नहीं।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह सवाल भी आया कि यदि कुछ अभ्यर्थियों की ओर से गड़बड़ी हुई है, तो क्या उसका असर पूरी परीक्षा पर डाला जा सकता है। वहीं, अगर परीक्षा की पूरी प्रक्रिया ही गंभीर रूप से प्रभावित हुई हो और दोषी तथा निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करना संभव न हो, तो पूरी परीक्षा रद्द करने का रास्ता भी खुल सकता है।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब हजारों-लाखों अभ्यर्थियों की नजर अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी है।
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