भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को समर्पित भव्य जतरा, मंत्री चमरा लिंडा ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

Anand Kumar
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रांची: झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और भगवान बिरसा मुंडा की अमर विरासत को समर्पित भव्य भगवान बिरसा मुंडा जतरा का शनिवार को शुभारंभ हुआ। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह), जेल मोड़ से जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रधान सचिव कृपानन्द झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव सह निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग राजीव लोचन, परियोजना निदेशक ITDA रांची मनीषा तिर्की, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रांची उर्वशी पांडेय सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

जेल मोड़ से मोरहाबादी तक निकली जतरा

भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क से शुरू हुई यह जतरा जेल मोड़ से करम टोली चौक, एसएसपी आवास होते हुए मोरहाबादी तक पहुंचेगी। जतरा के पूरे मार्ग पर झारखंड की विविध आदिवासी संस्कृतियों और परंपराओं की झलक देखने को मिली।

इस आयोजन को लेकर राजधानी में खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में आम नागरिक, संस्कृति प्रेमी और विभिन्न विभागों के अधिकारी जतरा में शामिल हुए।

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10 हजार कलाकारों ने दिखाया झारखंड की जनजातीय संस्कृति का रंग

भगवान बिरसा मुंडा जतरा में झारखंड के सभी जिलों से करीब 10 हजार कलाकारों ने हिस्सा लिया। कलाकार राज्य की विभिन्न जनजातियों से जुड़े हैं, जिनमें संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया, खरवार सहित अन्य जनजातीय समुदाय शामिल हैं।

कलाकार पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और पारंपरिक वाद्ययंत्रों से सुसज्जित होकर जतरा में शामिल हुए। ढोल, नगाड़ा, मांदर और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों ने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया।

छह झांकियों में दिखा बिरसा मुंडा का संघर्ष

जतरा के दौरान कुल छह आकर्षक झांकियों का प्रदर्शन किया गया। इन झांकियों के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, उनके संघर्ष, बलिदान और आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया गया।

झांकियों के जरिए नई पीढ़ी को भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष और उनके विचारों से जोड़ने का प्रयास किया गया।

सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, आदिवासी अस्मिता का प्रतीक

आयोजकों के अनुसार, यह जतरा महज एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के त्याग, संघर्ष और बलिदान को याद करने तथा आदिवासी अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का माध्यम है।

जतरा में झारखंड के लगभग सभी क्षेत्रों और विभिन्न जनजातीय समुदायों की भागीदारी ने राज्य की सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश भी दिया।

मंत्री चमरा लिंडा ने कलाकारों का बढ़ाया उत्साह

जतरा को हरी झंडी दिखाने के बाद मंत्री चमरा लिंडा ने सभी कलाकारों, आयोजकों और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन आदिवासी युवाओं को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही यह झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।

मंत्री ने जतरा की सफलता की कामना करते हुए कलाकारों और प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।

झारखंड की सांस्कृतिक विरासत की दिखी भव्य तस्वीर

भगवान बिरसा मुंडा जतरा में हजारों कलाकारों की मौजूदगी और अलग-अलग जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने झारखंड की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि की भव्य तस्वीर पेश की।

पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, लोकनृत्य और वाद्ययंत्रों के साथ कलाकारों की भागीदारी ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। आयोजन के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को याद करने के साथ-साथ झारखंड की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का संदेश दिया गया।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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