नई दिल्ली: राष्ट्रीय हितधारक परामर्श 2026 के दूसरे दिन औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और सतत आर्थिक विकास को केंद्र में रखते हुए उच्चस्तरीय विचार-विमर्श आयोजित किया गया। नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान “औद्योगिक संवर्धन एवं निवेश” विषय पर हुए सत्र में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों और विकास साझेदारों ने झारखंड को देश के अग्रणी औद्योगिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
इस सत्र की अध्यक्षता राज्य के उद्योग, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास मंत्री संजय प्रसाद यादव ने की। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने, प्रगतिशील औद्योगिक नीतियां लागू करने, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना विकसित करने और कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और निजी निवेश पर विशेष जोर
परिचर्चा के दौरान झारखंड के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत बनाने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार, निजी निवेश को आकर्षित करने, औद्योगिक अवसंरचना के विस्तार, क्षेत्र-विशिष्ट निवेश अवसरों के विकास तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने पर विशेष बल दिया गया।
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साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को मजबूत करने, सतत औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने तथा राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का अधिकतम उपयोग कर दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने पर भी व्यापक चर्चा हुई।
खनन से लेकर लॉजिस्टिक्स तक अपार संभावनाएं
विशेषज्ञों ने खनन, इस्पात, विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में झारखंड की विशाल संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने नीति की स्थिरता, तकनीक आधारित विकास, नवाचार और परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन को निवेश आकर्षित करने की प्रमुख शर्त बताया।
वक्ताओं ने कहा कि यदि इन क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से कार्य किया जाए तो झारखंड देश के सबसे पसंदीदा निवेश स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
“राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़े”
मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार की स्पष्ट सोच है कि उद्योग और पर्यटन दोनों क्षेत्रों का विकास इस तरह किया जाए कि राज्य के युवाओं को रोजगार और आजीविका के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
उन्होंने कहा,
“इन दोनों क्षेत्रों—उद्योग और पर्यटन—के माध्यम से हमारी तथा माननीय मुख्यमंत्री जी की स्पष्ट सोच है कि झारखंड में ही ऐसे अवसर सृजित किए जाएँ, जिससे राज्य के लोगों को रोजगार और आजीविका के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।”
उन्होंने स्वीकार किया कि पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड अभी कई राज्यों से पीछे है, लेकिन सरकार राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा का बेहतर उपयोग कर पर्यटन और उद्योग दोनों क्षेत्रों में नए अवसर विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मंत्री ने कहा कि उद्योग राज्य की आवश्यकता है और राज्य उद्योग की। सरकार और उद्योग जगत की मजबूत साझेदारी से ही निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
उद्योग जगत के दिग्गजों ने रखे सुझाव
इस परिचर्चा का संचालन उद्योग, खान एवं भू-तत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल ने किया।
पैनल चर्चा में वी. के. शर्मा (उपाध्यक्ष, जिंदल समूह), सिद्धार्थ रूंगटा (अध्यक्ष, रूंगटा समूह), निवृति राय (प्रबंध निदेशक, इन्वेस्ट इंडिया), सुंदर रमन (उपाध्यक्ष, टाटा स्टील) तथा देवयानी खंखोजे (प्रेसिडेंट–कॉरपोरेट अफेयर्स, वरुण बेवरेजेज लिमिटेड) ने अपने विचार साझा किए और निवेश बढ़ाने के लिए नीति सुधार, तकनीकी नवाचार तथा उद्योग-अनुकूल माहौल विकसित करने पर जोर दिया।
कई मंत्री रहे मौजूद
कार्यक्रम में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव, सुदिव्य कुमार, इरफान अंसारी तथा शिल्पी नेहा तिर्की सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
परिचर्चा का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि सरकार, उद्योग जगत और अन्य सभी हितधारक मिलकर झारखंड को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में कार्य करेंगे। सम्मेलन से प्राप्त सुझाव राज्य की दीर्घकालिक औद्योगिक विकास रणनीति को मजबूती प्रदान करेंगे और भारत की विकास यात्रा में झारखंड की भूमिका को और सशक्त बनाएंगे।
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