रिम्स में नामांकन गड़बड़ी की जांच तेज, CID की टीम पहुंची; एडमिशन रिकॉर्ड और दस्तावेज खंगाले

Anand Kumar
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रांची : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में वर्ष 2025 की मेडिकल नामांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। शिकायतों के आधार पर बुधवार को सीआईडी की दो टीमें रिम्स पहुंचीं और एडमिशन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी।

सीआईडी की टीम रिम्स प्रबंधन के डीन कार्यालय, डाटा सेंटर और अन्य संबंधित विभागों में पहुंचकर नामांकन प्रक्रिया से जुड़ी फाइलों और रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला लेने के आरोपों की भी समीक्षा की जा रही है।

एडीजी CID के निर्देश पर गठित हुई जांच टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजी सीआईडी के निर्देश पर विशेष जांच टीमों का गठन किया गया है। जांच में तकनीकी सहायता के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। टीम एडमिशन से जुड़े सभी दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है और संदिग्ध रिकॉर्ड को अपने कब्जे में ले रही है।

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अयोग्य अभ्यर्थियों को दाखिला देने का आरोप

शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2025 की नामांकन प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और कुछ अयोग्य अभ्यर्थियों को भी प्रवेश दिया गया। आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला न केवल प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों को प्रभावित करने वाला भी साबित हो सकता है।

टेंडर प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

नामांकन प्रक्रिया के अलावा रिम्स में टेंडर आवंटन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां इन शिकायतों की भी समीक्षा कर रही हैं। हालांकि फिलहाल जांच का मुख्य फोकस मेडिकल पाठ्यक्रमों में हुए दाखिलों पर है।

अभ्यर्थियों ने उठाया था मामला

बताया जा रहा है कि यह मुद्दा सबसे पहले कुछ अभ्यर्थियों ने उठाया था। पिछले वर्ष से ही नामांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे थे और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी। प्रारंभिक स्तर पर शिकायतों की पड़ताल के बाद मामला सीआईडी को सौंप दिया गया।

कई स्तरों पर जांच

सीआईडी की टीम यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित अनियमितताओं में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसकी जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है। जांच एजेंसी प्रवेश प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन और प्रशासनिक अनुमोदन की पूरी श्रृंखला की समीक्षा कर रही है।

फिलहाल जांच जारी है और सीआईडी की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी। अधिकारियों की ओर से अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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