राज्यसभा चुनाव में बढ़ी हलचल, महागठबंधन के 56 वोट बनाम NDA के 24 वोट का गणित चर्चा के केंद्र में
रांची, स्टाफ रिपोर्टर। झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस की ओर से प्रणव झा के नाम की आधिकारिक घोषणा के बाद चुनावी तस्वीर कुछ हद तक साफ हुई है, लेकिन भाजपा की रणनीति अभी भी पूरी तरह सामने नहीं आई है। इसी बीच निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने की चर्चाओं ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि भाजपा अपना अधिकृत उम्मीदवार उतारने के बजाय किसी निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने की रणनीति पर भी विचार कर सकती है। ऐसे में परिमल नाथवानी का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।
महागठबंधन के पास 56, NDA के पास 24 वोट
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जबकि भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा सहित NDA खेमे के पास 24 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि महागठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो दोनों सीटें जीतने का गणित उसके पक्ष में दिखता है। लेकिन झारखंड के राज्यसभा चुनावों का इतिहास बताता है कि अंतिम समय में समीकरण बदलते रहे हैं और क्रॉस वोटिंग या रणनीतिक मतदान कई बार परिणाम को प्रभावित कर चुका है।
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सीएम आवास में महागठबंधन की बैठक
मुख्यमंत्री आवास में महागठबंधन की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सहयोगी दलों के नेताओं ने भाग लिया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गठबंधन प्रत्याशियों को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि सभी विधायक एकजुट होकर उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करें।
बैठक में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा और झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम के समर्थन को लेकर भी चर्चा हुई। गठबंधन नेतृत्व की कोशिश है कि दोनों उम्मीदवारों को आवश्यक वोट सुनिश्चित किए जाएं।
भाजपा की रणनीति पर सस्पेंस
भाजपा ने अभी तक अपने अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। हालांकि गौरव वल्लभ द्वारा नामांकन पत्र लिए जाने के बाद उनके नाम की चर्चा तेज हुई थी, लेकिन पार्टी की ओर से अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा के भीतर दो तरह की रणनीति पर विचार हुआ है—एक, पार्टी अपना उम्मीदवार उतारे; दूसरा, किसी प्रभावशाली निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देकर चुनावी मुकाबले को रोचक बनाया जाए।
परिमल नाथवानी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
झारखंड से दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके परिमल नाथवानी ने नामांकन पत्र लेकर चुनावी हलचल बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई नेताओं से संपर्क साधा है।
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार नाथवानी के समर्थन में आवश्यक प्रस्तावक जुटाने की कवायद भी चल रही है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा में सरसंघचालक की राजनीति?
राजनीतिक विश्लेषण में यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा इस चुनाव में सीधे मुकाबले के बजाय “सरसंघचालक” की भूमिका निभाने की कोशिश कर सकती है। यानी पार्टी पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति को प्रभावित करे और प्रत्यक्ष रूप से मुकाबले में न उतरे।
हालांकि भाजपा नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इस तरह की किसी रणनीति की पुष्टि नहीं की है।
निर्णायक होगा एक-एक वोट
राज्यसभा चुनाव के गणित को देखते हुए इस बार एक-एक वोट महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महागठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने लायक संख्या जरूर है, लेकिन मार्जिन बहुत सीमित है। ऐसे में अनुपस्थिति, क्रॉस वोटिंग या रणनीतिक मतदान चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
इसी वजह से राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है और अगले कुछ दिनों में तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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