बूंद-बूंद से बदलाव – विश्व जल दिवस पर टाटा स्टील का ‘जल-समानता’ संकल्प

Anand Kumar
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taff Reporter, Jamshedpur : हर साल 22 मार्च को मनाया जाने वाला ‘विश्व जल दिवस’ हमें प्रकृति के सबसे अनमोल उपहार – ‘जल’ के संरक्षण की याद दिलाता है। संयुक्त राष्ट्र के मार्गदर्शन में यह दिवस उन 2.1 अरब लोगों की चुनौतियों को रेखांकित करता है, जो आज भी स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता से वंचित हैं। इस्पात निर्माण की जटिल प्रक्रियाओं में पानी एक अनिवार्य घटक है, इसलिए इसका विवेकपूर्ण उपयोग और संचयन औद्योगिक उत्तरदायित्व का मुख्य स्तंभ बन गया है। यही कारण है कि टाटा स्टील ने अपने ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन) ढांचे में जल प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

ताजे पानी की खपत में कमी: एक ठोस लक्ष्य टाटा स्टील ने अपने पारिस्थितिक पदचिह्न (Environmental Footprint) को न्यूनतम करने के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार की है। कंपनी का लक्ष्य अपने परिचालन में ताजे पानी की विशिष्ट खपत (SFWC) को उल्लेखनीय रूप से कम करना है। वित्त वर्ष 2025 के 3.49 घन मीटर प्रति टन क्रूड स्टील के स्तर को घटाकर 2030 तक 1.5 m³/tcs पर लाने का संकल्प लिया गया है। इस लक्ष्य को पाने के लिए जल पुनर्चक्रण (Recycling), शोधित सीवेज के पुन: उपयोग और वर्षा जल संचयन जैसी आधुनिक प्रणालियों को तेजी से लागू किया जा रहा है।

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शून्य अपशिष्ट जल निर्वहन (ZED) की ओर बढ़ते कदम टाटा स्टील की एक बड़ी उपलब्धि भारत के सभी विनिर्माण संयंत्रों को वित्त वर्ष 2026–27 तक ‘जीरो एफ्लुएंट डिस्चार्ज’ (ZED) बनाना है। कलिंगानगर, मेरामंडली और गम्हरिया जैसे संयंत्र पहले ही यह गौरव हासिल कर चुके हैं। जमशेदपुर सहित अन्य प्रमुख केंद्रों पर अत्याधुनिक एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) स्थापित किए गए हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि इस्तेमाल किया गया पानी शुद्ध होकर दोबारा काम में आए और प्राकृतिक जल स्रोतों पर दबाव कम हो।

सामुदायिक सशक्तिकरण और जल संचयन कंपनी की जल-संरक्षण पहल कारखानों की दीवारों से बाहर निकलकर सीधे समाज से जुड़ती है। वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान टाटा स्टील ने 101.6 मिलियन घन फीट भूजल भंडारण की क्षमता विकसित की है। मेरामंडली में 2.74 एकड़ में फैला विशाल तालाब, जिसकी क्षमता 55,000 किलोलीटर है, न केवल सतही जल को रोकता है बल्कि स्थानीय समुदायों की जरूरतों को भी पूरा करता है। यहाँ जलीय जीवन की रक्षा के लिए ‘फ्लोटिंग फाउंटेन’ जैसी तकनीक का उपयोग कर ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखा जा रहा है।

इसी कड़ी में, सीआरएम बारा नवीकरण परियोजना और नोआमुंडी का ‘एक्वा पार्क’ उल्लेखनीय हैं। ये परियोजनाएं सालाना लगभग 75,000 घन मीटर वर्षा जल को सहेजने के लिए बनाई गई हैं, जिससे नदियों पर निर्भरता कम हुई है और स्थानीय जल स्तर में सुधार हुआ है।

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वैश्विक पदचिह्न और भविष्य की राह टाटा स्टील का यह जल-दर्शन दुनिया भर में फैला है। थाईलैंड स्थित ‘सिस्को प्लांट’ ने 48,916 घन मीटर का जलाशय बनाकर ‘ZED’ का दर्जा प्राप्त किया है। वहीं नीदरलैंड्स के आइमुदीन और ब्रिटेन के पोर्ट टैलबोट संयंत्रों में ऐसी उन्नत कूलिंग प्रणालियां कार्यरत हैं, जो पानी को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शुद्ध कर पर्यावरण को लौटाती हैं।

इन निरंतर प्रयासों के माध्यम से टाटा स्टील इस वर्ष के वैश्विक संदेश को सार्थक कर रही है: “जहां जल का संरक्षण है, वहीं समानता और समृद्धि का वास है।”

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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