प्रकृति से ही सृजन-प्रकृति में ही विलय, सरहुल है अस्तित्व का प्रतीक : हेमंत सोरेन

Anand Kumar
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पूरे परिवार संग प्रकृति पर्व सरहुल में शामिल हुए सीएम, सिरमटोली और करमटोली सरनास्थल पर की पूजा-अर्चना

Ranchi : रांची की सड़कों पर आज मांदर की थाप और ‘जय सरना’ के उद्घोष के बीच प्रकृति पर्व सरहुल का उत्साह चरम पर रहा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पावन अवसर पर राज्यवासियों को बड़ी सौगात देते हुए न केवल दो प्रमुख सरनास्थलों पर पूजा-अर्चना की, बल्कि प्रकृति और आदिवासी संस्कृति के गहरे रिश्ते को रेखांकित करते हुए एक सशक्त संदेश भी दिया। मुख्यमंत्री के साथ उनकी धर्मपत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन तथा उनके दोनों बेटे भी इस उत्सव में शामिल हुए, जिससे माहौल और भी उल्लासपूर्ण हो गया।

खुद गाड़ी चलाकर परिवार सहित पहुंचे सिरमटोली

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक अलग ही अंदाज़ आज देखने को मिला। वे अपने आवास से खुद गाड़ी चलाकर परिवार सहित सिरमटोली स्थित ऐतिहासिक सरनास्थल पहुंचे। उनके साथ पत्नी कल्पना सोरेन और दोनों बेटे सवार थे। सिरमटोली पहुँचने पर पाहन और पारंपरिक वेशभूषा में सजे आदिवासी समुदाय ने उनका भव्य स्वागत किया। यहां मुख्यमंत्री ने परंपरा के अनुरूप विधिवत् पूजा-अर्चना की और राज्य की सुख, समृद्धि व खुशहाली की कामना की। पाहन ने पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजन संपन्न कराया और मुख्यमंत्री के कान में सखुआ (साल) का फूल खोंसकर उन्हें आशीर्वाद दिया।

“समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी”

सिरमटोली में जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़े रहने का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा, “प्रकृति से बड़ी पूजा और कुछ नहीं है। प्रकृति में ही सभी चीजों का सृजन और विलय होता है। प्रकृति है, तो मानव जीवन है।” मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय की अटूट आस्था की सराहना करते हुए कहा कि उनके पूर्वजों ने दीर्घकालीन सोच के साथ ऐसी व्यवस्थाएं बनाई हैं, जो हमें एक छत के नीचे एकत्रित करती हैं। उन्होंने प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

यह भी पढ़ें – क्या है सरहुल पर्व? जानिए सखुआ फूल, धरती-सूर्य विवाह और प्रकृति पूजा की परंपरा

करमटोली में मांदर की थाप पर झूमे सीएम

सिरमटोली के बाद मुख्यमंत्री परिवार सहित आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर, करमटोली पहुंचे। यहां आयोजित सरहुल पूजा महोत्सव-2026 में सम्मिलित होकर उन्होंने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा की। मुख्यमंत्री ने यहाँ भी प्रकृति की रक्षा का संदेश दिया और भौतिकवादी युग में अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की अपील की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खुद मांदर बजाकर उत्सव की खुशियों को दोगुना कर दिया, जिससे वहां मौजूद युवा और छात्र-छात्राएं झूम उठे।

शुभकामनाओं का दौर

मौके पर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की एवं विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपनी ओर से झारखंड वासियों को प्रकृति पर्व सरहुल महोत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के पावन अवसर पर सिर्फ मानव ही नहीं, बल्कि प्रकृति भी झूम रही है।

तसवीरों में देखें

सरहुल
पूजास्थल पर पहुंचे हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन।
सरहुल
पूजा करतीं कल्पना सोरेन।
सरहुल
पूजा करते हेमंत सोरेन।
सरहुल
मांदर बजाते मुख्यमंत्री।
सरहुल
कल्पना सोरेन ने साझा की पारिवारिक तसवीर।
सरहुल
कार चलाकर सरनास्थल की तरफ जाते हेमंत सोरेन।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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