Jan-Man Special : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम आने के बाद 301वीं रैंक को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि, अब यह और गहराता जा रहा है। एक तरफ बिहार के आरा की रहने वाली और रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह हैं, जो अपने दावे पर कायम हैं, तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की मूल निवासी और एम्स (AIIMS) पटना से मास्टर्स कर चुकीं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा सिंह हैं, जिन्होंने डिजिटल सबूतों के साथ इस रैंक पर अपनी दावेदारी पुख्ता की है।
अब इस हाई-प्रोफाइल कन्फ्यूजन का फैसला UPSC के पाले में है।
आरा की आकांक्षा का पलटवार: “मेरा रोल नंबर सही, UPSC करे जांच”

गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा द्वारा क्यूआर (QR) कोड की विसंगति उजागर किए जाने के बाद, आरा की आकांक्षा सिंह ने हार नहीं मानी है। मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने दावा किया कि उनका रोल नंबर 856794 ही है और उन्होंने इसी आधार पर परीक्षा दी है।
एडमिट कार्ड के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर दूसरे रोल नंबर (856569) के दिखने पर उन्होंने कहा कि इसकी तकनीकी जानकारी केवल UPSC ही दे सकता है। अपनी सत्यता साबित करने के लिए उन्होंने UPSC से परीक्षा के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की मांग की है। मामले को सुलझाने के लिए आकांक्षा और उनके परिजन रविवार को दिल्ली रवाना हो रहे हैं और सोमवार को सीधे UPSC मुख्यालय में अपना पक्ष रखेंगे। उनका मानना है कि उनका नाम चर्चा में आने के कारण दूसरी उम्मीदवार ने इसका फायदा उठाया है।
डॉ. आकांक्षा का ठोस सुबूत: “बारकोड झूठ नहीं बोलता
” इस पूरे विवाद के बीच असली हकदार होने का दावा कर रहीं गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह ने एक वीडियो जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। दिल्ली में रहकर तैयारी करने वाली डॉ. आकांक्षा का कहना है कि आरा की उम्मीदवार का दावा पूरी तरह निराधार है।
उन्होंने अपना ई-समन लेटर और अन्य दस्तावेज साझा करते हुए एक बेहद तकनीकी और ठोस सुबूत पेश किया है। डॉ. आकांक्षा के एडमिट कार्ड पर छपे रोल नंबर और उसके क्यूआर कोड को स्कैन करने पर आने वाला नंबर बिल्कुल एक है। इसके विपरीत, आरा की आकांक्षा के कार्ड पर रोल नंबर 856794 छपा जरूर है, लेकिन स्कैन करने पर वह 856569 दिखाता है। डॉ. आकांक्षा ने स्पष्ट कहा, “मैं बस अपनी इस सफलता के पल को जीना चाहती हूँ। हकीकत एडमिट कार्ड के बारकोड से साफ हो जाएगी।”

आगे क्या? क्यूआर कोड के डिजिटल सुबूत फिलहाल गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा के पक्ष में मजबूती से खड़े दिख रहे हैं और आरा की उम्मीदवार के दस्तावेजों पर ‘फर्जीवाड़े’ या ‘तकनीकी चूक’ के गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। सोमवार को जब आरा की आकांक्षा UPSC दफ्तर पहुंचेंगी, तो उम्मीद है कि आयोग इस अजीबोगरीब स्थिति पर अपना आधिकारिक बयान जारी करेगा, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।

पहले भी हो चुके हैं विवाद
यूपीएससी (UPSC) के इतिहास में पहले भी ‘एक नाम और एक रोल नंबर’ को लेकर ऐसे ही बड़े और अजीबोगरीब विवाद हो चुके हैं। सबसे चर्चित मामला UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2022 (जिसके नतीजे मई 2023 में आए थे) का है। उस समय एक साथ दो ऐसे केस सामने आए थे, जिसने पूरे देश और मीडिया को हैरान कर दिया था और मौजूदा आकांक्षा सिंह के मामले की तरह ही भ्रम पैदा कर दिया था।
1. तुषार बनाम तुषार (44वीं रैंक का विवाद)
- क्या था मामला: 44वीं रैंक पर दो अलग-अलग राज्यों के ‘तुषार कुमार’ ने दावा किया था। दोनों ने मीडिया के सामने एक ही रोल नंबर (1521306) वाले एडमिट कार्ड और इंटरव्यू कॉल लेटर पेश किए थे।
- दावेदार: एक बिहार के भागलपुर निवासी ‘तुषार कुमार’ थे और दूसरे हरियाणा के रेवाड़ी निवासी ‘तुषार’।
- सच क्या निकला: जब UPSC ने आधिकारिक जांच की, तो पता चला कि बिहार के तुषार कुमार असली कैंडिडेट हैं और 44वीं रैंक उन्हीं की है। रेवाड़ी के तुषार ने प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में ही फेल होने के बावजूद फर्जी तरीके से एडमिट कार्ड एडिट करके झूठा दावा किया था।
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2. आयशा बनाम आयशा (184वीं रैंक का विवाद)
- क्या था मामला: 184वीं रैंक और एक ही रोल नंबर (7811744) पर मध्य प्रदेश की दो लड़कियों ने अपना-अपना दावा ठोक दिया था। दोनों का पहला नाम आयशा था।
- दावेदार: एक देवास (मध्य प्रदेश) की ‘आयशा फातिमा’ थीं और दूसरी अलीराजपुर (मध्य प्रदेश) की ‘आयशा मकरानी’।
- सच क्या निकला: UPSC की विस्तृत जांच में सामने आया कि असली कैंडिडेट देवास की आयशा फातिमा थीं। आयशा मकरानी के एडमिट कार्ड में न तो QR कोड था और न ही UPSC का वॉटरमार्क। मकरानी का असली रोल नंबर कुछ और था और वह प्रीलिम्स का कटऑफ भी पार नहीं कर पाई थीं।
UPSC ने तब क्या एक्शन लिया था? इन दोनों मामलों के तूल पकड़ने के बाद UPSC ने एक सख्त प्रेस रिलीज जारी कर स्पष्ट किया था कि उनका सिस्टम पूरी तरह फुलप्रूफ है और किसी भी सूरत में एक रोल नंबर दो उम्मीदवारों को जारी नहीं किया जा सकता। आयोग ने फर्जी दावा करने वाले उम्मीदवारों (रेवाड़ी के तुषार और अलीराजपुर की आयशा मकरानी) के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी (Forged Documents) करने के आरोप में आपराधिक (Criminal) और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही थी।
मौजूदा ‘आकांक्षा सिंह’ मामले से समानता : आरा और गाजीपुर की ‘आकांक्षा सिंह’ के बीच चल रहा मौजूदा विवाद बिल्कुल 2022 वाले पैटर्न पर ही आधारित दिख रहा है—एक जैसा नाम और फर्जी/एडिटेड एडमिट कार्ड। जिस तरह आयशा मकरानी के एडमिट कार्ड में क्यूआर (QR) कोड की गड़बड़ी से फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था, ठीक वैसे ही आरा की आकांक्षा के एडमिट कार्ड को स्कैन करने पर अलग रोल नंबर निकलना इस बात का बहुत मजबूत संकेत है कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है।