UPSC 2025: ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती को 301वीं रैंक, दुमका की सुदीपा ने बिना कोचिंग और साहिबगंज की दर्जी की बेटी निहारिका ने रचा इतिहास

Anand Kumar
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Jan-Man Desk : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम जारी कर दिया है। इस बार के नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की आकांक्षा सिंह की हो रही है, जिन्होंने ऑल इंडिया 301वीं रैंक हासिल की है। आकांक्षा की इस सफलता ने न केवल उनके परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि एक पुराने चर्चित नाम को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा का बड़ा मुकाम

आकांक्षा सिंह बिहार के चर्चित चेहरे रहे ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ मुखियाजी (रणवीर सेना के संस्थापक) की पोती हैं। आकांक्षा के पिता इंदुभूषण सिंह ने बताया कि मुखियाजी का हमेशा से सपना था कि उनके परिवार का कोई सदस्य देश का बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बने। आरा के डीके जैन कॉलेज से स्नातक और फिर दिल्ली में कड़ी मेहनत के बाद आकांक्षा ने अपने दूसरे प्रयास में इस सपने को हकीकत में बदल दिया। फिलहाल उन्हें IRS कैडर मिलने की संभावना है।
बिहार के अभ्यर्थियों ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया है। टॉप-10 में बिहार के दो और टॉप-20 में कुल चार अभ्यर्थी शामिल हैं:
1. राघव झुनझुनवाला (मुजफ्फरपुर): ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल कर बिहार का मान बढ़ाया।
2. उज्ज्वल प्रियांक (पटना): ऑल इंडिया रैंक 10 प्राप्त की।
3. मोनिका श्रीवास्तव (औरंगाबाद): ऑल इंडिया रैंक 16 पर रहीं।
4. रविराज (नवादा) : ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की।

झारखंड के ‘रियल हीरोज’: सुदीपा और बिपुल बनेंगे IAS, राज्य का बढ़ाया मान

दुमका की सुदीपा दत्ता ने झारखंड में किया टॉप (AIR 41): झारखंड के दुमका जिले की सुदीपा दत्ता ने यूपीएससी 2025 की परीक्षा में पूरे राज्य का नाम रोशन किया है। उन्होंने ऑल इंडिया 41वीं रैंक हासिल की है, जिससे उनका IAS बनना तय है। सुदीपा की यह सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान के बजाय दुमका की स्टेट लाइब्रेरी में बैठकर घंटों खुद से पढ़ाई की। सीमित संसाधनों और छोटे शहर में रहकर अपनी तैयारी को मुकाम तक पहुँचाने वाली सुदीपा ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो देश की सबसे कठिन परीक्षा में भी शीर्ष स्थान पाया जा सकता है। उनके पिता सच्चिदानंद दत्ता और माता उनकी इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं।


लातेहार के बिपुल गुप्ता ने रचा इतिहास (AIR 103): लातेहार जिले के महुआडांड़ (चटकपुर) जैसे सुदूर क्षेत्र से आने वाले बिपुल गुप्ता ने 103वीं रैंक प्राप्त कर झारखंड का गौरव बढ़ाया है। बिपुल की इस शानदार रैंक के साथ ही उनका भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयन सुनिश्चित हो गया है। उनके गांव चटकपुर में इस वक्त जश्न का माहौल है और ग्रामीण इसे ‘इलाके की सबसे बड़ी जीत’ मान रहे हैं। बिपुल ने अपनी मेहनत से यह दिखा दिया कि झारखंड के सुदूर ग्रामीण अंचलों के युवाओं में भी वह प्रतिभा है, जो देश की सर्वोच्च सेवा में जाकर समाज और राष्ट्र की दशा बदल सकती है।

झारखंड की बेटियों का संघर्ष: अभावों को दी मात

यूपीएससी के इन नतीजों में झारखंड की दो बेटियों—साहिबगंज की निहारिका और धनबाद की श्रुति—की कहानियां सबसे ज्यादा प्रेरणादायक हैं।

1. साहिबगंज: दर्जी की बेटी निहारिका ने भरी उड़ान (AIR 365)

साहिबगंज की निहारिका सिन्हा की सफलता संघर्ष की एक बेमिसाल दास्तां है। उनके पिता निरंजन सिन्हा पेशे से दर्जी हैं और मां शबनम कुमारी अनुबंध पर नर्स हैं।

  • असफलता से मिली सीख: 2024 के पहले प्रयास में निहारिका मुख्य परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
  • सफलता: दूसरे प्रयास में 365वीं रैंक लाकर उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो गरीबी रुकावट नहीं बन सकती।

2. धनबाद: बैंक क्लर्क श्रुति मोदी ने ड्यूटी के साथ पाया मुकाम (AIR 569)

धनबाद के बरोरा की श्रुति मोदी ने एक नई मिसाल पेश की है। श्रुति वर्तमान में बैंक क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। बैंक की थका देने वाली नौकरी के बीच समय निकालकर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और 569वीं रैंक हासिल की। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित SRCC कॉलेज से पढ़ाई की है। उनके पिता सीताराम मोदी और मां सुषमा मोदी अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे हैं।


रांची के इस्तियाक रहमान की ‘ऊंची उड़ान’: इमिग्रेशन ऑफिसर से अब बनेंगे प्रशासनिक अधिकारी (AIR 354)

राजधानी रांची के डोरंडा (फिरदौस नगर, मानिटोटोला) निवासी इस्तियाक रहमान ने यूपीएससी 2025 में 354वीं रैंक हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। इस्तियाक की सफलता उन युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है जो वर्किंग प्रोफेशनल (कामकाजी) होते हुए बड़े सपनों का पीछा करते हैं।

ड्यूटी के साथ तैयारी: इस्तियाक पिछले लगभग छह महीनों से गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत हैदराबाद एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। अपनी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी जारी रखी और अंततः सफलता की अंतिम सूची में अपनी जगह बनाई।

झारखंड के सफल अभ्यर्थी: एक नजर में

नामजिलारैंकपारिवारिक पृष्ठभूमि / पद
सुदीपा दत्तादुमका41झारखंड स्टेट टॉपर
बिपुल गुप्तालातेहार103भावी IAS अधिकारी
इस्तियाक रहमानरांची354वर्तमान इमिग्रेशन ऑफिसर
निहारिका सिन्हासाहिबगंज365दर्जी की बेटी
श्रुति मोदीधनबाद569बैंक क्लर्क

यूपीएससी 2025 के ये परिणाम बताते हैं कि प्रतिभा किसी खास वर्ग या शहर की जागीर नहीं है। जहाँ बिहार की आकांक्षा सिंह ने एक चर्चित विरासत के सपने को पूरा किया, वहीं झारखंड की बेटियों ने अपनी मेहनत से शून्य से शिखर तक का सफर तय किया। ‘जन-मन की बात’ इन सभी भावी अधिकारियों को सलाम करता है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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