Patna : बिहार की सियासत में पिछले दो दशकों से चला आ रहा ‘नीतीश युग’ अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ ही यह पूरी तरह साफ हो गया है कि नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और बिहार को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुख्यमंत्री मिलेगा।
सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है और 26 मार्च (रामनवमी) तक बिहार में भाजपा नेतृत्व वाली नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हो सकता है।
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सत्ता परिवर्तन का पूरा रोडमैप
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया एक तय समय सीमा के भीतर पूरी होगी:
- नामांकन और चयन: राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 16 मार्च तक चलेगी। 9 अप्रैल के बाद नए सदस्य शपथ लेंगे।
- विधायक दल की बैठक: इस्तीफा देने से पहले भाजपा और जदयू अपने-अपने विधायक दल की अलग-अलग बैठकें करेंगी, जिसमें नए नेता का चुनाव होगा।
- NDA की मुहर: इसके बाद एनडीए (NDA) के विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जो मुख्यमंत्री पद का दावेदार होगा।
- इस्तीफा और शपथ: अंत में नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे और नए नेता सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
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32 मंत्रियों वाला नया ‘पावर’ फॉर्मूला
सूत्रों की मानें तो इस बार बिहार में केवल मुख्यमंत्री ही नहीं बदलेगा, बल्कि मंत्रिमंडल का स्वरूप भी पूरी तरह ‘फुल फ्लैज्ड’ होगा।
- मंत्रियों की संख्या: नई सरकार में कुल 32 मंत्री हो सकते हैं।
- हिस्सेदारी: भाजपा और जदयू के कोटे से 14-14 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है।
- सहयोगी दल: चिराग पासवान की LJP(R) को 2 मंत्री पद, जबकि उपेंद्र कुशवाहा की RLM और जीतन राम मांझी की HAM को 1-1 मंत्री पद मिल सकता है।
कौन होगा भाजपा का पहला मुख्यमंत्री?
बिहार में भाजपा पहली बार मुख्यमंत्री पद संभालने जा रही है, ऐसे में दो नाम सबसे प्रमुखता से उभर रहे हैं:
1. सम्राट चौधरी: वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे हैं। कोइरी समाज से आने वाले सम्राट चौधरी के जरिए भाजपा बिहार के ‘लव-कुश’ समीकरण (कुर्मी-कोइरी) को पूरी तरह अपने पक्ष में करना चाहती है। उनकी आक्रामक राजनीतिक शैली और संगठन पर पकड़ उन्हें शीर्ष पद के लिए सबसे फिट उम्मीदवार बनाती है।
2. विजय सिन्हा: डिप्टी सीएम विजय सिन्हा भी प्रबल दावेदार हैं। संघ (RSS) के करीबी और एक कड़क प्रशासक के रूप में उनकी छवि भाजपा के ‘कोर’ एजेंडे को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
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जदयू के हिस्से आएंगे दो डिप्टी सीएम: निशांत कुमार की एंट्री?
सत्ता के नए समीकरण में जदयू को दो डिप्टी सीएम के पद मिलने की संभावना है। इसमें सबसे चौंकाने वाला नाम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार खुद को सक्रिय राजनीति से दूर कर विरासत की कमान निशांत को सौंप सकते हैं। इसके अलावा, नीतीश के भरोसेमंद विजय चौधरी का नाम भी डिप्टी सीएम के लिए तय माना जा रहा है।
इन विभागों पर फंस सकता है पेंच
भले ही मुख्यमंत्री पद पर समझौता हो गया हो, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) और गृह विभाग को लेकर दोनों पार्टियों के बीच खींचतान जारी है। भाजपा 2005 के बाद पहली बार मिले गृह विभाग को छोड़ना नहीं चाहती, जबकि जदयू का तर्क है कि मुख्यमंत्री भाजपा का होने पर ये अहम विभाग उनके पास होने चाहिए।
बिहार की राजनीति में 26 मार्च की तारीख मील का पत्थर साबित होने वाली है। पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री होना राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा को पूरी तरह बदल सकता है।