UPSC ने कुल 958 उम्मीदवारों का चयन विभिन्न सेवाओं (IAS, IPS, IFS आदि) के लिए किया है
New Delhi :संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFS) समेत अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए आयोजित सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम जारी कर दिया है। इस वर्ष के नतीजों में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ (रावतभाटा) के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) हासिल कर इतिहास रच दिया है।
इस साल का परिणाम न केवल सफल उम्मीदवारों की मेहनत के लिए याद किया जाएगा, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई ‘कैडर एलोकेशन पॉलिसी 2026’ की वजह से भी चर्चा में है, जिसने दशकों पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है।

UPSC 2025: चयन के मुख्य आंकड़े
आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जारी सूची के अनुसार, कुल 958 उम्मीदवारों का चयन अंतिम रूप से किया गया है। इन उम्मीदवारों को उनकी रैंक और वरीयता के आधार पर निम्नलिखित सेवाएं आवंटित की जाएंगी:
- IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा): 180 उम्मीदवार
- IFS (भारतीय विदेश सेवा): 55 उम्मीदवार
- IPS (भारतीय पुलिस सेवा): 150 उम्मीदवार
- अन्य केंद्रीय सेवाएं (Group A & B): शेष उम्मीदवार
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सफलता की तीन कहानियां: संघर्ष और संकल्प
- अनुज अग्निहोत्री (AIR 1): रावतभाटा के रहने वाले अनुज ने यह साबित किया कि असफलता ही सफलता की सीढ़ी है। यह उनका तीसरा प्रयास था। 2023 में वे दिल्ली में SDM के पद पर चयनित हुए थे, लेकिन उनका लक्ष्य शीर्ष स्थान था। उनके पिता राजस्थान परमाणु बिजलीघर में कार्यरत हैं।
- एकांश ढुल (AIR 3): पंचकूला के एकांश ढुल ने अपनी तीसरी रैंक के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) का नाम रोशन किया है। उनके पिता कृष्ण ढुल भाजपा नेता हैं और माता स्कूल प्रिंसिपल।
- आस्था जैन (AIR 9): उत्तर प्रदेश के शामली की रहने वाली आस्था जैन की कहानी प्रेरणादायक है। एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी आस्था ने 2024 में IPS के लिए चयनित होने के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज IAS बनने का सपना पूरा किया।
कैडर एलोकेशन पॉलिसी 2026: एक ऐतिहासिक बदलाव
इस साल के नतीजों के साथ ही भारत सरकार ने ‘कैडर एलोकेशन पॉलिसी 2026’ को पूरी तरह लागू कर दिया है। 2017 से चली आ रही ‘जोनल सिस्टम’ (North, South, East, West, Central) को अब खत्म कर दिया गया है।
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पुरानी व्यवस्था बनाम नई व्यवस्था
अब तक 25 कैडरों को 5 भौगोलिक जोन (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य) में बांटा गया था। इससे अक्सर उम्मीदवारों को उनके गृह राज्य के पड़ोसी राज्य मिल जाते थे।
क्या है नया ‘साइकिल सिस्टम’?
अब तक उम्मीदवारों को उनके भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर पड़ोसी राज्य मिल जाते थे, जिससे अखिल भारतीय सेवा का ‘रूटेशन’ सीमित रहता था। नई नीति में सभी 25 कैडरों को वर्णानुक्रम (Alphabetical Order) में सजाकर 4 अलग-अलग ग्रुप्स में बांट दिया गया है।
ग्रुप का वर्गीकरण:
- ग्रुप-I: दिल्ली (AGMUT), आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़।
- ग्रुप-II: गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश।
- ग्रुप-III: महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु।
- ग्रुप-IV: तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल।
विशेषज्ञ राय: इस बदलाव का उद्देश्य ‘अखिल भारतीय सेवा’ के मूल स्वरूप को मजबूत करना है, ताकि अधिकारी भाषाई और भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर देश के विभिन्न हिस्सों में अनुभव प्राप्त कर सकें।
इसका उम्मीदवारों पर क्या असर पड़ेगा?
पुराने सिस्टम में यदि हरियाणा के उम्मीदवार ने नॉर्थ जोन चुना था, तो उसे राजस्थान या यूपी मिलने की प्रबल संभावना रहती थी। लेकिन नए ग्रुप-II के तहत, हरियाणा के उम्मीदवार को झारखंड, कर्नाटक या केरल जैसे राज्यों में भेजा जा सकता है। इससे उत्तर भारत का अधिकारी दक्षिण में और दक्षिण का अधिकारी उत्तर या पूर्वोत्तर भारत में सेवा देने के लिए प्रोत्साहित होगा।
झारखंड के संदर्भ में महत्व
झारखंड (ग्रुप-II) अब प्रशासनिक दृष्टि से गुजरात और केरल जैसे राज्यों के साथ एक ही श्रेणी में है। इसका मतलब है कि झारखंड के उम्मीदवारों को अब अधिक विविधतापूर्ण भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा, वहीं राज्य को भी देश के विभिन्न हिस्सों से आए मेधावी अधिकारियों का अनुभव मिलेगा।
आगे क्या?
सफल उम्मीदवारों का प्रशिक्षण (Foundation Course) अब लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में शुरू होगा। जो उम्मीदवार इस बार सफल नहीं हो सके, उनके लिए UPSC 2026 की प्रीलिम्स परीक्षा की तैयारियां अब तेज हो गई हैं।
संपादकीय टिप्पणी : जन-मन की बात सभी सफल उम्मीदवारों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देता है।
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