सिर्फ हंगामा खड़ा करना और सुर्खियां बटोरना है जयराम महतो का मकसद?

Anand Kumar
8 Min Read

Political Analysis
Jan-Man Desk
: क्या विधायक जयराम महतो की रुचि बस हंगामा करने में रुचि है, समस्याओं के समाधान में नहीं। और क्या इसीलिए आज वे मंत्री के ठोस जवाब के बावजूद सिर्फ सुर्खिया बटोरने के लिए आवास नीलाम करने और विधायक निधि बंद करने जैसे अप्रासंगिक बातें करते रहे ताकि उन्हे रीलों और सुर्खियों में जगह मिले।

गुरुवार को झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन डुमरी विधायक जयराम महतो ने ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति का मामला उठाया। कहा कि अब तक छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि छात्रों को उनकी राशि आखिर कब तक मिलेगी। और अगर केंद्र से हिस्सा नहीं मिलेगा तो सरकार एक लाइन में बता दे कि छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी।

इसके जवाब में कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कि आठवीं कक्षा तक के बच्चों को स्कॉलरशिप राज्य सरकार देती है। इसलिए उसमें कोई समस्या नहीं है। नौवीं, दसवीं और पोस्ट मैट्रिक के विद्यार्थियों को केंद्रांश की राशि केंद्र सरकार से प्राप्त नहीं होने के कारण राज्यांश जारी नहीं किया जा सका है। इसलिए स्कॉलरशिप नहीं दी जा सकी है। क्योंकि वित्त विभाग के संकल्प के अनुसार केंद्रांश मिलने के बाद ही राज्यांश की निकासी हो सकती है। मंत्री ने स्वीकार किया कि इसी प्रक्रिया के कारण भुगतान में देरी हुई है।

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मंत्री ने आश्वस्त किया कि केंद्र का हिस्सा मिलने में हो रही देरी को देखते हुए विभाग वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छात्रवृत्ति देने के लिए पर्याप्त पैसा है लेकिन वित्त विभाग के संकल्प को शिथिल करके ही राशि का उपयोग किया जा सकता है। मंत्री ने यह भी कहा कि उ्होंने सचिव को पीत पत्र लिख दिया है कि वे इस दिशा में यानी वित्त विभाग के नियम को शिथिल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें।

यानी चमरा लिंडा ने साफ कहा कि केंद्र से हिस्सा मिलने का उन्होंने इंतजार किया लेकिन अब उन्होंने अपने स्तर से छात्रवृत्ति भुगतान के लिए काम शुरू कर दिया है। सेक्रेट्री को बफशीट लिख दी है और विभाग के पास जो बजट है, उसमें से ही सकॉलरशिप का भुगतान कर दिया जायेगा।

लेकिन हैरानी की बात है कि इतनी साफ और स्पष्ट बात जयराम महतो को समझ नहीं आयी या उन्होंने जानबूझ कर समझने की कोशिश नहीं की और लगातार कहते रहे कि मंत्री एक लाइन में कहें कि अगर केंद्र अपना शेयर नही देगा तो सरकार स्कॉलरशिप नहीं देगी। स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने भी कहा कि मंत्री जी ने बहुत अच्छा उत्तर दिया है लेकिन जयराम महतो संतुष्ट नहीं हुए और फिर उन्होंने डिमांड कर दी कि जब तक छात्रवृत्ति की राशि नहीं दी जाती तब तक विद्यार्थियों को बिना इंटरेस्ट के लोन दिया जाये। वे बार-बार इस बात को दोहराते रहे। उन्होंने विधायक निधि रोक कर और विधायकों का बंगला नीलाम करने की सलाह भी दे डाली।

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जयराम महतो का रुख देख कर लगा कि वे बस रील कटवाने और हेडलाइन बनवाने के चक्कर में थे। वरना मंत्री का जवाब बिल्कुल साफ था कि केंद्र के हिस्से का हमने इंतजार किया। लेकिन अब हमने अपने स्तर से प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीधे विभाग पैसा नहीं दे सकता क्योंकि वित्त विभाग का संकल्प है कि जबतक केंद्र अपना हिस्सा नहीं देगा, राज्य अपना हिस्सा जारी नहीं कर सकता। लेकिन अब वित्त विभाग के संकल्प को शिथिल करके विभागीय बजट से ही नौवीं, दसवीं और पोस्ट मैट्रिक के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की दिशा में काम किया जा रहा है।

अब इसमें न समझनेवाली कौन सी बात है, जो जयराम बार बार केंद्र के शेयर की बात कर रहे थे। मंत्री ने तो बोला कि केंद्र शेयर नहीं देगा तो भी हम देंगे, फिर विधायक निधि रोककर दीजिए या बंगला नीलाम कर दीजिए जैसी बात कहने का मलतब साफ है कि जयराम को छात्रवृत्ति के भुगतान में उतना इंट्रेस्ट नहीं था जितना ऐसे बयानों की रील बनवाने और हेडलाइन बनाने पर था।

जयराम महतो पीएचडी के शोधार्थी हैं और भाषा आंदोलन से चर्चा में आये और सोशल मीडिया की लहर पर सवार होकर विधायक बन गये। लेकिन चमरा लिंडा भी कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं। वे फायरब्रांड छात्र नेता रहे हैं। उनका संगठन आदिवासी छात्र संघ आजसू के बाद दूसरा सबसे एक्टिव और एग्रेसिव संगठन हुआ करता था। जयराम का एग्रेशन फेशियल अग्रशेन है, सोशल मीडिया पर दिखने का अग्रेशन है। उनके पास सड़क पर आंदोलन करने का अनुभव नहीं है।

लेकिन चमरा लिंडा ने सड़क पर आंदोलन किया है। पुलिस की लाठी खायी है। गिरफ्तारी के डर से भागे नहीं है। उस समय सोशल मीडिया नहीं था। रीलें नहीं कटती थी इसलिए जयराम महतो की पीढ़ी को चमरा लिंडा के बारे में पता नहीं है। लेकिन इसके बावजूद चमका लिंडा ने जितनी शांति से और स्पष्टता से जयराम महतो के सवालों का जवाब दिया, वह उनकी मैच्योरिटी को दिखाता है।

चमरा तीसरी बार विधायक बने हैं और पीएचडी की डिग्री भले उनके पास नहीं है लेकिन उनके अपने छोटे भाई इसी झारखंड कैडर के आइपीएस अधिकारी हैं। तो जाहिर पूरा परिवार पढ़ालिखा है और सरकारी सिस्टम हवाबाजी करने और चीखने से नहीं चलता।

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लेकिन जयराम भी क्या करें। हवा में हाथ भांज कर, चीख-चीख कर और बाहरी-भीतरी करके वे विधायक तो बन गये, लेकिन पांच साल बाद फिर जनता की शरण में जाना है। जमीन का अनुभव नहीं है। बस सोशल मीडिया पर चीखते रहेंगे तो लोग कितने दिन झेलेंगे। तो डेस्पेरेशन बढ़ रहा है। और इसी का नतीजा है कि मंत्री की जिस बात पर उनको धन्यवाद देना चाहिए था। वित्त मंत्री से मांग करनी चाहिए थी कि कल्याण मंत्री की पहल पर जल्दी क्लीयरेंस दीजिए, वो नहीं करके वे आवास नीलाम करने और विधायक निधि का पैसा बंद करके छात्रवृत्ति देने जैसे बचकाने सुझाव दे रहे हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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