झारखंड : वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पेश किया 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ का बजट, केंद्र से बकाया पर सवाल

Anand Kumar
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लोकभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को बजट की प्रति सौंपते वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर।

झारखंड बजट 2026-27: बढ़ा बजट आकार, लेकिन केंद्र से आर्थिक खींचतान ने बढ़ाई सियासी गर्मी

Ranchi : झारखंड विधानसभा में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,58,560 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। यह उनका लगातार दूसरा बजट है। सदन में प्रस्तुति से पहले उन्होंने लोकभवन जाकर राज्यपाल संतोष गंगवार को बजट की प्रति सौंपी। बजट भाषण में सरकार ने समावेशी विकास, वित्तीय अनुशासन और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई, वहीं केंद्र से बकाया और कर हिस्सेदारी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।

बजट की मुख्य बातें

  • कुल बजट आकार: 1,58,560 करोड़ रुपये
  • केंद्रीय कर हिस्सेदारी में लगभग 5,000 करोड़ रुपये लंबित
  • अनुदान मद में करीब 11,000 करोड़ रुपये की देरी
  • जीएसटी संरचना से अनुमानित 4,000 करोड़ रुपये वार्षिक नुकसान
  • 2025-26 बजट: 1,45,400 करोड़ रुपये

बजट का आकार बढ़ा, संकेत क्या हैं?

पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का मूल बजट 1,45,400 करोड़ रुपये था। इस बार बजट आकार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। सरकार का दावा है कि यह बढ़ोतरी बुनियादी ढांचे, सामाजिक क्षेत्र और कल्याणकारी योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से की गई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य की विकास दिशा तय करने वाला नीति-पत्र है। झारखंड को प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध और आदिवासी संस्कृति का रक्षक बताते हुए उन्होंने कहा कि अलग राज्य गठन का उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना और संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना था।


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केंद्र से बकाया पर तीखी टिप्पणी

बजट भाषण का सबसे राजनीतिक हिस्सा केंद्र–राज्य वित्तीय संबंधों पर रहा। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के लगभग 5,000 करोड़ रुपये अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके अलावा अनुदान मद में करीब 11,000 करोड़ रुपये लंबित हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मिलने वाली राशि समय पर नहीं मिल रही, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ता है। अनुदान मद में पिछले वर्षों में कटौती का भी जिक्र किया गया।


जीएसटी और साझा योजनाओं से बढ़ता दबाव

वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी दर संरचना के कारण राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 4,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। इसके अतिरिक्त, मनरेगा से जुड़ी परिवर्तित योजना में 60:40 के फंड शेयरिंग पैटर्न से राज्य पर करीब 5,640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक भार पड़ सकता है।

कोल कंपनियों के पास राज्य का 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया होने का मुद्दा भी सदन में उठाया गया। यह राशि यदि प्राप्त होती है तो राज्य की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है।


विकास बनाम वित्तीय यथार्थ

सरकार ने बजट को “समावेशी और सतत विकास” की रूपरेखा बताया है, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक चुनौती राजस्व संग्रह, पूंजीगत व्यय और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी।

पिछले बजट में 91,741.53 करोड़ रुपये योजना मद में थे, जिनमें से 17,073.61 करोड़ रुपये केंद्रीय योजनाओं से जुड़े थे। यह दर्शाता है कि राज्य की वित्तीय संरचना में केंद्र की भूमिका अब भी अहम है।


सदन में स्वेटर वितरण पर हंगामा

बजट पेश होने के दिन ही प्रश्नकाल के दौरान स्कूली बच्चों को ठंड में स्वेटर नहीं मिलने का मुद्दा उठा। जरमुंडी विधायक देवेंद्र कुंवर ने सरकार से जवाब मांगा। मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि पोशाक वितरण किया गया है और केंद्र की हिस्सेदारी जरूरी होती है। सदन अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में वितरण नहीं हुआ है, वहां केंद्र और राज्य दोनों के अंश से समान व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


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राजनीतिक संकेत

बजट प्रस्तुति ने यह स्पष्ट किया कि आने वाले महीनों में केंद्र–राज्य वित्तीय संबंध राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बने रह सकते हैं। बढ़े हुए बजट आकार के साथ सरकार ने विकास का संदेश दिया है, लेकिन बकाया और राजस्व दबाव के मुद्दे विपक्ष के लिए भी सवाल खड़े करने का अवसर बन सकते हैं।

झारखंड की आर्थिक दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि राजस्व सुदृढ़ीकरण, पूंजी निवेश और सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में संतुलन कितना प्रभावी रहता है।


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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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