आज विधानसभा में पेश होगा झारखंड का बजट, 1 लाख 61 हजार 5 सौ करोड़ हो सकता है आकार

Anand Kumar
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Ranchi : झारखंड का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट मंगलवार, 24 फरवरी को विधानसभा में पेश किया जाएगा। बजट का कुल आकार, प्राथमिकता वाले सेक्टर और राजकोषीय रणनीति को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। सरकार की ओर से औपचारिक प्रस्तुति तक बजट विवरण गोपनीय रखा जाता है, लेकिन आर्थिक विश्लेषक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संभावित तस्वीर पेश करते हैं।

बजट आकार को लेकर अनुमान

आर्थिक मामलों के जानकार और कांग्रेस नेता सूर्यकांत शुक्ला का अनुमान है कि इस बार राज्य का बजट करीब 1.61 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। उनका कहना है कि आर्थिक सर्वेक्षण और पिछले तीन वर्षों के बजट दस्तावेजों का अध्ययन आगामी बजट की दिशा को समझने में मदद करता है—खासकर विकास, रोजगार, कर्ज प्रबंधन और जीडीपी से जुड़े संकेतकों के संदर्भ में।


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राज्य की आर्थिक स्थिति: प्रमुख संकेतक

  • बेरोजगारी दर: 3.2% (सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी ताजा पीरियॉडिक लेबर फोर्स डेटा के अनुसार)
  • कर्ज-जीएसडीपी अनुपात: 25.3% (पहले 27.5%)
  • ब्याज बोझ: राजस्व प्राप्तियों का लगभग 6%

शुक्ला का दावा है कि व्यय अनुशासन और कर्ज प्रबंधन में सुधार से राज्य की राजकोषीय क्षमता मजबूत हुई है। कम ब्याज बोझ का अर्थ है कि उधारी की सर्विसिंग लागत अपेक्षाकृत किफायती बनी हुई है।


चिंता के बिंदु: बाहरी स्रोतों पर निर्भरता

सकारात्मक संकेतकों के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आती हैं:

  • राजस्व संरचना: राज्य के कुल राजस्व का लगभग 51% हिस्सा बाहरी स्रोतों से आता है, जबकि राज्य के अपने स्रोतों की हिस्सेदारी 49% के आसपास है।
  • नन-टैक्स राजस्व: कई वर्षों में अनुमानित लक्ष्य के मुकाबले वास्तविक संग्रह कम रहा है।

नन-टैक्स राजस्व: लक्ष्य बनाम वास्तविक संग्रह (चयनित वर्ष)

  • 2021-22: अनुमान 13,500 करोड़; संग्रह 3,470 करोड़ (लक्ष्य से काफी कम)
  • 2022-23: अनुमान 13,762 करोड़; संग्रह 12,830 करोड़
  • 2023-24: लक्ष्य 17,259 करोड़; संग्रह 13,425 करोड़
  • 2024-25 (अनुमान): लक्ष्य 19,300 करोड़; संभावित संग्रह 14,231 करोड़

विश्लेषकों का कहना है कि या तो लक्ष्य ऊंचा तय किया जाता है या फिर वसूली तंत्र में सुधार की आवश्यकता है। इसके अलावा, क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात भी मानक से कम बताया जाता है, जो निवेश और बैंकिंग गतिविधियों के विस्तार की जरूरत की ओर संकेत करता है।


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आगे की राह : संतुलित व्यय रणनीति

विशेषज्ञों का सुझाव है कि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स), कल्याणकारी योजनाओं और स्थापना व्यय के बीच संतुलन कायम रखना जरूरी है। यदि यह संतुलन मजबूत होता है और राज्य अपने स्रोतों से राजस्व बढ़ाने में सफल रहता है, तो झारखंड की राजकोषीय स्थिति और सुदृढ़ हो सकती है।


बजट से उम्मीद

आगामी बजट से उम्मीद है कि विकास, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर जोर कायम रहेगा, साथ ही राजस्व संग्रह में सुधार और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता मिलेगी। अंतिम तस्वीर बजट पेश होने के बाद स्पष्ट होगी, लेकिन उपलब्ध आंकड़े यह संकेत देते हैं कि राज्य के सामने अवसर और चुनौतियां दोनों मौजूद हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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