Ranchi : जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने शनिवार को विधानसभा में धनबाद जिले के बारनी घाट (दामोदर नदी) पर कथित अवैध खनन और नदी प्रदूषण का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि दामोदर की धारा मोड़कर भारी मशीनों से खनन कराया जा रहा है, जिससे नदी तंत्र और ग्रामीण पेयजल परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। सदन में राय ने प्रदूषण से जुड़ी तस्वीरें भी प्रस्तुत कीं।

NTPC और DVC पर नियम उल्लंघन का आरोप
सरयू राय ने ध्यानाकर्षण के दौरान कहा कि चंद्रपुरा क्षेत्र में NTPC और DVC द्वारा एनजीटी के दिशा-निर्देशों तथा राज्य के भवन उपविधियों का उल्लंघन किया जा रहा है। उनके मुताबिक, पहाड़ी/संवेदनशील क्षेत्र में नदी से 50 मीटर की दूरी तक राख (ऐश) का निस्तारण नहीं किया जाना चाहिए, जबकि यहां नदी तट के समीप गतिविधियां चल रही हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर प्रश्न
मीडिया से बातचीत में राय ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि टीम ने स्थल निरीक्षण किया था, तो कथित अवैध निर्माण/दीवार निर्माण को तत्काल क्यों नहीं रोका गया। रिपोर्ट 15 दिनों में आने तक नदी क्षेत्र में निर्माण आगे बढ़ जाने की आशंका जताई गई।

पेयजल और पर्यावरण पर असर
राय के अनुसार, दामोदर किनारे मुहान खोलकर खनन से नदी की धारा और जलग्रहण क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। इससे ग्रामीण पेयजल योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय कर त्वरित जांच कराई जाए और यदि उल्लंघन सिद्ध हो तो दंडात्मक कार्रवाई हो।
दशकों से अभियान चला रहे राय
विधायक सरयू राय ने नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए दशकों से निरंतर अभियान चलाए हैं, जिनमें दामोदर बचाओ आंदोलन सबसे प्रमुख है। 2004 में गंगा दशहरा के अवसर पर उन्होंने दामोदर नदी के उद्गम स्थल से शुरू कर कोलकाता तक जागरूकता एवं अध्ययन यात्रा शुरू की, जिसमें औद्योगिक अपशिष्ट, शहरी गंदगी और अवैध खनन के प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया गया। इस अभियान के परिणामस्वरूप दामोदर में औद्योगिक प्रदूषण काफी हद तक नियंत्रित हुआ। कई रिपोर्टों में कहा गया कि पहले लोग इसका पानी नहीं पीते थे, लेकिन अब लोग पीते हैं, नहाते हैं और छठ पूजा भी करते हैं।
2005-2006 से उन्होंने स्वर्णरेखा प्रदूषण मुक्ति अभियान शुरू किया, जिसमें नदी के उद्गम (रांची के नागड़ी-रानीचुआ क्षेत्र) से झारखंड में उसके अंतिम बिंदु तक अध्ययन यात्राएं की गईं, युगांतर भारती, नेचर फाउंडेशन और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर जनभागीदारी बढ़ाई गई। सरयू राय ने विधानसभा में बार-बार सवाल उठाकर स्वर्णरेखा और खरकई जैसी नदियों में अनुपचारित सीवेज के प्रवाह पर दबाव बनाया, जिसके जवाब में सरकार ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान की योजनाएं बताईं।
हाल ही में दिसंबर 2025 में उन्होंने घोषणा की कि फरवरी 2026 में दामोदर के प्रदूषण का पुनः अध्ययन होगा, जिसमें जर्मनी के पर्यावरणविद हस्को भी शामिल होंगे। उनका मानना है कि नदियों की अविरल और निर्मल धारा बनाए रखने के लिए जन-जागरूकता, कड़े कानूनों का पालन, सरकारी सहयोग और नागरिक भागीदारी आवश्यक है, और वे लगातार निरीक्षण, महोत्सव (जैसे दामोदर महोत्सव) और नीतिगत दबाव के माध्यम से इस दिशा में कार्यरत हैं।
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