मुख्यमंत्री ने 25 लाख महिलाओं के खातों में 2500 करोड़ ट्रांसफर किए, स्वरोजगार को बढ़ावा देने का दावा

Anand Kumar
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Patna : बिहार सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए राज्य की 25 लाख महिला लाभुकों के बैंक खातों में ₹10,000 प्रति लाभुक की दर से कुल ₹2,500 करोड़ की राशि ट्रांसफर की। यह राशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी गई।

कार्यक्रम मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित किया गया, जिसमें दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित कई वरिष्ठ मंत्री एवं अधिकारी मौजूद रहे।


योजना का उद्देश्य: स्वरोजगार और आर्थिक मजबूती

सरकार के अनुसार महिला रोजगार योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और परिवार की आय में स्थायी वृद्धि करना है।

यह योजना मुख्य रूप से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और जीविका नेटवर्क के माध्यम से संचालित हो रही है। जीविका मॉडल के जरिए ग्रामीण महिलाओं को समूह आधारित वित्तीय सहयोग और प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे छोटे व्यवसाय शुरू कर सकें।


अब तक का वित्तीय वितरण: आंकड़ों में तस्वीर

  • कुल लाभुक महिलाएं: 1 करोड़ 71 लाख 57 हजार से अधिक
  • अब तक वितरित राशि: लगभग ₹18,100 करोड़
  • वर्तमान चरण में वितरण: ₹2,500 करोड़
  • प्रति लाभुक राशि: ₹10,000

यह योजना सितंबर में शुरू की गई थी और विभिन्न चरणों में राशि हस्तांतरित की जाती रही है।


अगले चरण में ₹2 लाख तक सहायता की तैयारी

सरकार ने संकेत दिया है कि अगले चरण में पात्र महिलाओं को ₹2 लाख तक की सहायता दी जाएगी। हालांकि इतनी बड़ी राशि जारी करने से पहले व्यापक सत्यापन प्रक्रिया लागू की गई है।

वार्ड स्तर पर जांच और भौतिक सत्यापन

  • राज्य के 3398 वार्डों में विशेष कर्मियों की तैनाती
  • आवेदनों का दस्तावेजी और भौतिक सत्यापन
  • पात्रता की जांच के बाद ही राशि स्वीकृत

नगर निकाय स्तर पर यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया को 9 चरणों में पूरा करने की योजना है और जीविका को अंतिम सूची सौंपने की समय सीमा 15 मार्च 2026 निर्धारित की गई है।


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प्रशासनिक और राजनीतिक असर

विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखें तो:

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी बढ़ेगी
  • स्वयं सहायता समूहों की भूमिका मजबूत होगी
  • महिला वोटबैंक पर सकारात्मक प्रभाव संभव
  • स्थानीय स्तर पर छोटे व्यापार और सूक्ष्म उद्यम को बढ़ावा

हालांकि, बड़े पैमाने पर वितरण के कारण निगरानी और पारदर्शिता चुनौतीपूर्ण बनी रहेगी। वार्ड स्तर सत्यापन प्रक्रिया इसी जोखिम को कम करने का प्रयास है।


क्या यह मॉडल दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता दे पाएगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि एकमुश्त सहायता तभी प्रभावी होती है जब उसके साथ:

  • कौशल प्रशिक्षण
  • बाजार तक पहुंच
  • बैंकिंग सहयोग
  • निरंतर निगरानी

जुड़ा हो। जीविका मॉडल के कारण इस योजना की सफलता की संभावना अन्य योजनाओं की तुलना में अधिक मानी जा रही है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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